बाराबंकी जिला प्रशासन की सक्रियता से 80 वर्षीय वृद्ध और उनका बेटा बना कोविड चैम्पियन

बाराबंकी. जिला प्रशासन बाराबंकी की सक्रियता ने कोविड संक्रमण के ग्राफ को न केवल नियंत्रित किया। बल्कि जिले में अब तक 6753 कोविड के मरीजों में से 6394 मरीज कोरोना से जंग जीतकर वापस अपनी दैनिक दिनचर्या में भी लौट चुके हैं। इसी क्रम में डॉक्टर ज्ञान सिसोदिया एवं उनके पिता जनार्दन सिंह आयु 80 वर्ष भी कोविड की जंग जीतकर आज स्वस्थ जीवन जी रहें है।

रायबरेली के निवासी

डॉक्टर सिसोदिया एवं उनके पिता मुख्य रूप से रायबरेली जिले के निवासी हैं। डॉ सिसोदिया ने बताया कि मैं खुद कोरोना संक्रमित हो गया, उसके बाद हास्पिटल में भर्ती हो गया। अचानक 12 अगस्त को मेरे पिता को भी सांस लेने में परेशानी होनी शुरू हो गई, कोरोना की जांच करने पर उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आयी। तत्काल एल 2 रेलवे कोच चिकित्सालय रायबरेली में भर्ती कराया गया। 15 अगस्त को पिता की तबीयत अचानक ज्यादा खराब होने लगी तो चिकित्सकों ने एल 3 के चिकित्सालय में भर्ती कराने हेतु मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी के लिए रिफर किया गया।

मेयो हॉस्पिटल में हुए थे भर्ती

बाराबंकी के कोविड कमांड सेंटर एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन में 16 अगस्त की सुबह मेयो हॉस्पिटल बाराबंकी के आईसीयू में उनको भर्ती किया गया। चिकित्सालय द्वारा तत्काल ऑक्सीजन एवं दवाइयां दी गई तो रात में थोड़ा आराम मिला। परंतु ऑक्सीजन हटाने पर तुरंत ऑक्सीजन लेवल नीचे चला जा रहा था। बहुत परेशान होकर उनकी देखरेख हेतु मैं खुद आईसीयू पिता जी के साथ भर्ती होना चाहा। परंतु मुझे वहां पर भर्ती होने की अनुमति नहीं दी गई। मौके पर चिकित्सकों एवं प्रभारी द्वारा पूर्ण ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई। तबतक मेरे पिता की हालत बहुत ही खराब थी और जीवित रहने की संभावना काफी कम लगने लगी थी।

मिला काफी सहयोग

जिला प्रशासन एवं चिकित्सालय प्रशासन के बृजेश विष्ठ द्वारा पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। स्टाफ दवाइयां एवं इंजेक्शन देने के लिए समय पर आ जाती थी। खुद चिकित्सक हूं तो उनका मेडिकेशन इत्यादि खुद करने लगा। भर्ती के समय मेरे पिता के फेफड़े लगभग 70 प्रतिशत ज्यादा संक्रमित हो गये थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं कमांड सेंटर के साथ-साथ सीएम हेल्पलाइन से नियमित चिकित्सालय द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं के संबंध में बराबर जानकारी एवं हालचाल लिया जा रहा था। उनका कहना है कि जिला प्रशासन और मेयो अस्पताल में स्टाफ के अच्छे व्यवहार तथा चिकित्सालय प्रशासन के सहयोग से पिता को नया जीवन मिला। जिससे अब 80 वर्षीय मेरे पिता पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

बरतें सतर्कता

डॉ सिसोदिया ने बताया कि कोरोना वायरस के सम्बन्ध में सभी लोगों से पूरी सावधानी एवं सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होने कहा कि कोरोना बीमारी से बिल्कुल ना घबराए, करोना वायरस के लक्षण होते ही चिकित्सालय में भर्ती हो जाएं। विशेषकर परिवार में बुजुर्ग सदस्यों के प्रति कोरोना को लेकर गम्भीरता बरतें। कोरोना के लक्षण होने पर उनको तत्काल अस्पताल में भर्ती कराएं। जिससे उनको समुचित उपचार मिल सके और वें पूरी तरह से स्वस्थ हो सकें।



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