सब्जी, दाल के बाद सरसों के तेल की कीमतों में जबरदस्त इजाफा, इस वजह से और महंगा होगा सरसों का तेल

लखनऊ. आम जनता की रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है। लगातार बढ़ रही महंगाई से अब आम जरूरी वस्तुएं आम जनता की पकड़ से दूर होती जा रही है। अभी तक तो सब्जियों की बढ़ती कीमतों से जनता परेशान थी, उसके बाद अरहर सहित कई दालों के रेट अचानक बढ़ गए हैं। अरहर की दाल का फुटकर रेट 140 रुपए किलो हो गया है। अब सरसों के तेल में भी अचानक भारी वृद्धि आ गई है। 1 अक्‍टूबर 2020 को सरसों के तेल में ब्‍लेंडिंग पर लगाए गए प्रतिबंध से सरसों के तेल की कीमतों में यकायक 30-40 रुपए प्रति किलोग्राम तक की तेजी आ गई है। मौजूदा समय में सरसों के तेल का थोक मूल्य 122 रुपए प्रति किग्रा चल रहा है। वहीं, खुदरा में 140 रुपए प्रति किलोग्राम सरसों का तेल बिक रहा है।

यूपी सहित पूरे देश में एक अक्तूबर 2020 से सरसों के तेल में कोई और तेल मिलाने पर पाबंदी लगा दी गई। पहले ब्लेंडेड (मिश्रित) सरसों के तेल में सोयाबीन, पामोलिन और राइस ब्रान तेल भी मिला देते थे। पर अब ऐसा करना कानूनी जुर्म होगा। मतलब सरसों के तेल में करीब 20 फीसदी तक की ब्लेंडिंग की जाती थी। इससे पहले जनवरी 2020 में पॉम ऑयल पर पाबंदी लगा दी गई थी। सरकार का तर्क है कि ब्लेंडिंग की आड़ में बहुत से व्यापारी मिलावट का धंधा कर रहे थे और ब्लेंडिंग नहीं होने से सरसों की खपत भी बढ़ेगी, जिससे किसानों को फायदा होगा।

यूपी में जुलाई माह में ब्रांडेड सरसों के तेल 105-110 रुपए प्रति लीटर आसानी से मिल जाते थे। पर अब 150 रुपए से कम में सरसों का तेल मिलना मुश्किल है। प्रदेश में खाद्य तेल की खपत उत्पादन के सापेक्ष काफी अधिक है। अभी खुले बाजार में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (4650 रुपए प्रति कुंतल) से 850 रुपए तक ज्यादा रेट पर बिक रही है।



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