कोरोना के संकट में सुरक्षा दे रहा यह स्वास्थ्य बीमा, बढ़ रहा इस पॉलिसी को लेकर रुझान

लखनऊ. कोरोना काल में स्वास्थ्य बीमा की ओर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। लोग स्वास्थ्य को लेकर सचेत हो रहे हैं। टेक्नोलॉजी की उपलब्धता और संक्रमण के दायरे को देखते हुए लोगों का रुझान अधिकतर कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की ओर है। यूपी में ही प्रतिदिन औसत 2000 से 2500 लोग स्वास्थ्य बीमा करवा रहे हैं, ताकि संक्रमण की स्थिति में उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े। भारतीय जीवन बीमा निगम व अन्य निजी बीमा कंपनियां कोरोना से संबंधित पॉलिसी भी दे रही हैं, जिनका प्रीमियम 500 रुपये से शुरू होता है। इस कारण भी स्वास्थ्य बीमा कराने वालों की संख्या में पहले की तुलना में चार गुना तक इजाफा हुआ है।

कोरोना से बचाव के लिए रक्षक और कवच पॉलिसी

बीमा कंपनियां कोरोना कवच और रक्षक जैसी पॉलिसी दे रही हैं। कोरोना रक्षक पॉलिसी साढ़े तीन, साढ़े छह व साढ़े नौ माह की अवधि के लिए है। न्यूनतम 500 रुपये में साढ़े तीन माह के लिए खुद को सुरक्षित किया जा सकता है, जिसमें एक लाख रुपये तक का इलाज शामिल है। कोरोना कवच के तहत 50,000 रुपये से पांच लाख तक, तो कोरोना रक्षक के तहत 50,000 रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस की व्यवस्था है।

एक व्यक्ति के लिए एक ही इंश्योरेंस

एक व्यक्ति के लिए एक ही इंश्योरेंस मान्य रहेगा। अलग-अलग कंपनियों से एक ही इंश्योरेंस लेने पर दूसरा अमान्य हो जाएगा। पॉलिसी की राशि के भुगतान के 15 दिनों बाद ही इंश्योरेंस की अवधि शुरू हो जाएगी। हालांकि, इस पॉलिसी को रिन्यू नहीं कराया जा सकेगा।

72 घंटों के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी

अगर कोई व्यक्ति कोरोना रक्षक पॉलिसी लेता है, तो इंश्योरेंस के भुगतान के लिए उसे 72 घंटों तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। जबकि घर में इलाज कराने पर कोरोना रक्षक पॉलिसी के तहत कोई खर्च नहीं मिलेगा। कोरोना से संक्रमण की रिपोर्ट सरकार से मान्यता प्राप्त लैब की होनी चाहिए।

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