उत्तर प्रदेश से मॉनसून की विदाई, इस बार पड़ेगी कड़ाके की ठंड, लंबा होगा सर्दी का मौसम

लखनऊ. उत्तर प्रदेश से मॉनसून (Monsoon) अब विदा हो रहा है। पिछले साल की तुलना में इस साल का मॉनसून कमजोर रहा। बीते साल के मुकाबले इस साल जुलाई-अगस्त में बारिश तो अच्छी हुई लेकिन यह सामान्य से कम है। सितंबर माह की भी तुलना की जाए, तो इस महीने की बारिश पिछले साल के मुकाबले कम रही। इसके साथ ही जाड़े के मौसम का आगाज शुरू हो चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार कड़ाके की ठंड पड़ने के साथ ही सर्दी का मौसम (Winter Season) लंबा चलेगा। 15 अक्टूबर से तापमान में कमी आने लगेगी, जिसके बाद से जाड़े की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी।

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बन रही 'ला नीना' की स्थिति

स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक जीपी शर्मा के मुताबिक, इस समय 'ला नीना' की स्थिति बन रही है। इसके चलते सर्दी का मौसम लंबा हो सकता है और कड़ाके की ठंड भी पड़ सकती है। स्थानीय मौसम वैज्ञानिक जेपी गुप्ता ने बताया कि इस हफ्ते मौसम शुष्क बना रहेगा। आसमान साफ रहेगा और दिन का तापमान भी 33-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

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रबी की खेती के लिए शुभ संकेत

जाड़े का मौसम रबी की फसल के लिए अच्छा माना जाता है। ठंड के चलते रबी फसलों मसलन अनाज, तिलहन और दालों की पैदावार बढ़ती है, जो कि देश के खाद्यान्न उत्पादन के लिए भी शुभ संकेत होता है। जाड़े का मौसम रबी की फसलों के लिए अनुकूल मौसम माना जाता है।

पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों में पिछले सप्ताह भारी बारिश हुई। इसके बाद पूरे इलाके में दिन के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। इससे रबी की फसलों के लिए आदर्श स्थिति बनी हुई है। उधर, मॉनसून की अच्छी बारिश से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात की मिट्टी में नमी पर्याप्त है, जिससे वहां गेहूं की खेती पहले हो सकती है। दूसरी दलहन व तिलहनी फसलों की खेती भी मिट्टी की प्राकृतिक नमी में हो जाएगी। इसके विपरीत उत्तरी राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सितंबर में सामान्य से कम बारिश हुई है। इसी वजह से उत्तरी क्षेत्र के जलाशयों में जल का स्तर सामान्य से कम हो गया है। गेहूं उत्पादक इन राज्यों में खेती 100 फीसद सिंचित है। लेकिन ठंड का सीजन लंबा खिंचने से गेहूं की उत्पादकता बढ़ सकती है।

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