Cyber Insurance Police: अब साइबर फ्राॅड से बचने के लिये भी ले सकते हैं इंश्योरेंस

लखनऊ. दुनिया जितनी डिजिटल होती जा रही है साइबर ठगी का खतरा भी उतना ही बढ़ता जा रहा है। साइबर फ्राॅड के मामलों में साल दर साल लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है। कभी बैंकिंग अपडेट, कभी केवाईसी या फिर एटीएम या क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर अपराधी लोगों के बैंक अकाउंट से उनकी रकम चुटिकयों में उड़ा देते हैं। ऐसे साइबर ठगी के शिकार उपभोक्ताओं को नुकसान से बचाने के लिये यूं तो आरबीआई ने कुछ नियम बना रखे हैं, लेकिन आप इंश्योरेंस लेकर भी साइबर खतरों के प्रति टेंशन फ्री रह सकते हैं।

 

जी हां साइबर ठगी से हुए नुकसान से बचाने के लिये डिजिटल सुरक्षा ग्रूप इंश्योरेंस जैसी चीजों की मदद भी ली जा सकती है। हाल ही में एक कंपनी की ओर से पेश डिजिटल सुरक्षा ग्रूप इंश्योरेंस में तो 50 पैसे रोजाना से भी कम खर्च पर ऑनलाइन ठगी के जोखिम से सुरक्षा दिये जाने का दावा किया गया है।

 

ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म पर जितनी निर्भरता बढ़ गई है, साइबर फ्राॅड के खतरे भी उतने ही बढ़े हैं। बैंकिंग से लेकर शाॅपिंग और पढ़ाई से लेकर बिल जमा व मनोरंजन जैसे कामों के लिये ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म पर निर्भरता काफी हद तक बढ़ गई है, जिससे साइबर अपराधियों के लिये शिकार भी आसनी से मुहैया हो रहे हैं। बढ़ते साइबर क्राइम के खतरे को देखते हुए इससे बचने के लिये साइबर इंश्योरेंस का सहारा लिया जा सकता है।

 

साइबर इंश्योरेंस पाॅलीसी साइबर फ्राॅड से हुए नुकसान को कवर करती है। फिशिंग, ईमेल स्पूफिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, आदि मामलों में कवर मुहैया कराती है। कुछ कंपनियां साइबर सिक्योरिटी के तहत इंश्योरेंस कवर भी ऑफर करती हैं। 75 लाख रुपये तक का कवर 9 से 10 हजार रुपये के प्रीमियम पर लिया जा सकता है।



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