RSS के स्थापना दिवस पर टूटी 95 साल पुरानी परम्परा

मेरठ. दशहरे के दिन ही 1925 में आरएसएस की स्थापना की गई थी। इसलिए आरएसएस दशहरे के दिन अपना पथ संचलन निकालकर स्थापना दिवस मनाता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण से चलते 1925 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब आरएसएस का पथ संचलन नहीं निकल सका। 95 साल पुरानी आरएसएस की परंपरा पर कोरोना ने इस बार ब्रेक लगा दिया।

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कोरोना महामारी के चलते दशहरे पर इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सार्वजनिक शस्त्र पूजन समारोह भी नहीं हुआ। स्वयंसेवकों घर व नगरों में निर्धारित स्थानों पर ही ध्वज व भारत माता का चित्र आदि लगाकर शस्त्र पूजन किया। बता दें कि स्वयंसेवकों को शनिवार को भी ऑनलाइन शाखा के दौरान विजयादशमी के कार्यक्रमों की जानकारी दी गई थी। संघ के विभाग संपर्क प्रमुख अरुण जिंदल ने बताया कि 32 नगरों में कार्यक्रम होंगे। जबकि इनमें से कई नगरों में एक से अधिक जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक स्थान से बौद्धिक संदेश दिया जाएगा। इसके अलावा कार्यक्रम की शुरुआत में ध्वज स्थापना, एकल गीत का पाठ, शस्त्र पूजन व प्रार्थना की जाएगी। सभी स्थानों से बौद्धिक का मोबाइल से आनलाइन प्रसारण किया जाएगा। निर्देशित किया गया था कि पथ संचलन छोड़कर संघ की परिपाटी के सभी कार्यक्रम किए जाएंगे।

बता दें कि दशहरे के मौके पर पूरे जिले में बड़े पैमाने पर आरएसएस का पथ संचलन निकाला जाता था, जिसमें जिलेभर से आरएसएस कार्यकर्ता एकत्र होते हैं और वे पथ संचलन में भाग लेते थे। इस पथ संचलन में आरएसएस के कार्यकर्ता शस्त्र लेकर चलते थे और उनके ऊपर जगह-जगह पुष्प वर्षा होती थी। यह पथ संचलन पूरे नगर का भ्रमण करता था। आरएसएस का यह पथ संचलन अनुशासन और एकता की मिसाल माना जाता था। पथ संचलन के बाद बौद्धिक भाषण होता था, लेकिन इस बार पथ संचलन नहीं निकाला गया।

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