Shardiya Navratri 2020: शनिवार से नवरात्री का पहला दिन कैसे करें कलश स्थापना ,पढ़िए पूरी खबर

लखनऊ,(Shardiya Navratri) नवरात्री में घट स्थापना से पहले संकल्प लेना होता हैं उसके बाद कलश में मिट्टी या गाय के गोबर से कलश को सजाते हैं जौ से। पुरुषोत्तम मास समाप्त होने के साथ ही 17 अक्टूबर शनिवार से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएंगे। नवरात्रि पूरे 9 दिन के हैं। 25 अक्टूबर को सुबह 11:14 बजे के बाद दशमी का मान शुरू हो जाएगा। इसी दिन विजय दशमी मनाई जाएगी।

पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि कलश में रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर गले में तीन धागावाली मौली लपेटे और कलश को एक ओर रख ले। कलश स्थापित किये जानेवाली भूमि अथवा चौकी पर कुंकुंम या रोली से अष्टदलकमल बनाकर निम्न मंत्र से भूमि का स्पर्श करना चाहिए।

(Shardiya Navratri) मन्त्र

ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धरत्री।
पृथिवीं यच्छ पृथिवीं द्रीं ह पृथिवीं मा हि सीः।।

(Shardiya Navratri) कलश पर नारियल की स्थापना करें

पंडित शक्ति मिश्रा ने कहाकि इसके बाद नारियल पर लाल कपडा लपेट ले उसके बाद मोली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रख दे। उन्होंने कहाकि देवी-देवताओं का कलश में आवाहन करें उसके अखंड ज्योति जो नौ दिन तक जलती रहेगी।

(Shardiya Navratri) कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चित्रा नक्षत्र में दोपहर 02:20 तक कलश स्थापना कर सकते है।
अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:30 से दोपहर 12:28 तक कलश स्थापना की जा सकती है।

(Shardiya Navratri) देवीदुर्गा के पूजन की सामग्री

पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि माँ दुर्गा की सुन्दर प्रतिमा, माता की प्रतिमा स्थापना के लिए चौकी, लाल वस्त्र , कलश/ घाट , नारियल का फल, पांच पल्लव आम का, फूल,अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और दशांग, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान,सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती किताब ,चुनरी, पैसा, माता दुर्गा की विशेष कृपा के लिए संकल्प तथा षोडशोपचार पूजन करने के बाद, प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए तथा पुनः वह घी किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए।



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