2 नवंबर 1990 की घटना में शहीद हुए कारसेवकों को संतों ने दी श्रद्धांजलि

अयोध्या : राम नगरी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन आज भी तीन दशकों बीते 1990 की घटना में शहीद कारसेवकों की याद दिला रही है। और आज अयोध्या के दिगंबर अखाड़ा में सीमित संतों के बीच आंदोलन में शहीद कारसेवकों को श्रद्धांजलि दी।

30 अक्टूबर व 2 नवंबर के दिन अयोध्या पहुंचे बड़ी संख्या में कारसेवको ने भगवान श्री राम के मंदिर को आजादी दिलाने के लिए विवादित ढांचे पर चढ़कर भगवा ध्वज फहराया था । जिसके बाद वर्तमान की मुलायम सिंह यादव की सरकार ने अयोध्या में गोली चलाने का आदेश दिया जिसमें लगभग हजारों की संख्या में कारसेवकों को गोली मारी गई। आज भी अयोध्या कि वह गलियां शहीद कारसेवकों की याद दिलाती हैं । रामजन्मभूमि से लगभग 500 मीटर दूर हनुमानगढ़ी चौराहे से लालकोठी जाने वाले मार्ग को 1990 की घटना के बाद कारसेवकों की याद में शहीद मार्ग कहा जाने लगा। वहीं इन शहीदों को लेकर दिगंबर अखाड़ा में शहीदों के स्मारक चिन्ह भी स्थापित किया गया। जिस पर प्रत्येक वर्ष राम भक्त इन कारसेवकों को 2 नवंबर के दिन श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. आज भी कोरोना को लेकर जारी एडवाइजरी के तहत सीमित कार्यक्रमों में श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान मंच राघवाचार्य, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, दंत धवन कुंड के महंत नारायणाचारी, बड़ा भक्त महल महंत अवधेश दास, हिंदू नेता मनीष पांडे, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा मुख्य रूप से मौजूद।

दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने बताया कि संग्राम जिंदगी है लड़ना तो पड़ेगा और जो लड़ नहीं सकेगा वह आगे बढ़ नहीं सकेगा भिक्षा मांगने से कोई काम नहीं होता संग्राम एक बहुत बड़ी चीज है संग्राम किया तो भारत को स्वतंत्र किया और राम जन्मभूमि के लिए भी संग्राम हुआ तो आज मंदिर का निर्माण होने जा रहा है अभी संग्राम में अनेकों कारसेवकों ने अपना बलिदान दिया है आज 2 नवंबर शहीद दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और उन सभी को सादर श्रद्धांजलि है।

भी प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि 30 अक्टूबर व 2 नवंबर की घटना अयोध्या के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी गई है ऑस्टिन यह गली जिस प्रकार से रक्त रंजित हुई उसे हम कभी भी भुला नहीं सकते यहां पर आने वाली जगदीश भर्ती रामसेवक कारसेवक थे उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी है और तब मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। 30 अक्टूबर में दो नंबर की घटना अगर अयोध्या में नहीं होता तो 6 दिसंबर की घटना कभी नहीं हो पाती और ना ही आज मंदिर निर्माण का कार्य भी शुरू हो पाता। और आज उन कारसेवकों को श्रद्धांजलि देने के लिए इस स्थान पर एकत्रित हुए हैं। हम सब उन कारसेवकों के प्रति नतमस्तक हैं जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी साथी एक संदेश भी अन्य हिंदू संगठनों को देते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन में जो हमेशा सक्रिय भूमिका में रहे उन लोगों को भी इस दिन को भव्य और दिव्य रूप से मनाना चाहिए जब विपरीत परिस्थितियों में सैकड़ों की संख्या में हम सब यहां उपस्थित रहे तो आज अनुकूल परिस्थितियों में भी सभी को ध्यान रखना चाहिए।



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