महामारी में न संसाधन, न भवन फिर भी शिक्षिका शिवानी सिंह का अद्भुत प्रयास, 22 गांवों के 1300 बच्चों को कर रहीं साक्षर

बाराबंकी. वैश्वक महामारी कोरोना वायरस के चलते लागू हुए लॉकडाउन के बाद से लम्बे समय तक स्कूल बंद होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर पड़ा है। शहरों में तो शिक्षक ऑनलाइन क्लास के माध्यम से बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं, मगर ग्रामीण इलाकों में यह संभव नहीं हो पाया। सीमित संसाधन होने की वजह बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई। जिसके चलते गांवों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कुछ शिक्षक नए-नए तरीके इजाद करके बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें एक बाराबंकी जिले की शिक्षिका शिवानी सिंह भी हैं। जिन्होंने गांवों में बच्चों को पढ़ाने के लिए खास मुहिम छेड़ रखी है। उनकी पढ़ाई का स्तर किसी निजी स्कूल से कहीं अच्छा है। वो बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी तो पढ़ाती ही हैं, साथ ही स्पैनिश भाषा भी सिखाती हैं। उनके पढ़ाए बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी तो बोलते ही है, उतनी ही तेजी से स्पैनिश भी बोलते हैं।

लॉकडाउन में बच्चों की पढ़ाई हुई थी प्रभावित

बाराबंकी जिले की हैदरगढ़ तहसील के प्राथमिक विद्यालय भियामऊ की शिक्षिका शिवानी सिंह की इस मुहिम की वजह से अब करीब 1300 बच्चे स्कूल न खुलने के बावजूद पढ़ पा रहे हैं। दरअसल शिक्षिका शिवानी सिंह ने देखा कि लॉकडाउन के दौरान गांव में बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हो रही थी, गांव में ऑनलाइन क्लास चलाना भी मुमकिन नहीं था। क्योंकि गांव में ज्यादातर बच्चों के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं थे, तब उन्होंने खुद ही गांव में जाकर कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। मगर बहुत कम बच्चे ही पढ़ पा रहे थे, तब उन्होंने गांव के कुछ बड़े बच्चे जो इंटर या ग्रेजुएशन कर रहे हैं उनको छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने साथ जोड़ा। ताकि वे दिन में थोड़ा समय निकाल कर छोटे बच्चों को गांव में कहीं खुली जगह में समूह में पढ़ायें, ऐसे में यह प्रयास रंग लाया और आज उनकी यह मुहिम 22 गांवों तक पहुंच चुकी है। आज इलाके हर गांव में ऐसे युवा टोली बना कर छोटे बच्चों को पढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि इन गांवों में अब करीब 1,300 बच्चों को शिक्षा मुहैया हो रही हैI उनकी पढ़ाई का स्तर किसी निजी स्कूल से कहीं अच्छा है। वो बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी तो पढ़ाती ही हैं, साथ ही स्पैनिश भाषा भी सिखाती हैं। उनके पढ़ाए बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी तो बोलते ही है, उतनी ही तेजी से स्पैनिश भी बोलते हैं।

बच्चे नि:शुल्क दे रहे शिक्षा

इस काम में शिवानी सिंह की मुहिम का हिस्सा बनीं पूर्णिमा दिवेदी ने बताया कि वह पहले कोचिंग में शिक्षा देने का काम करती थीं। मगर लॉक डाउन में जब कोचिंग बंद हो गई तो शिवानी दीदी ने उन्हें प्रेरित किया और वह आज उनके साथ वह निःशुल्क शिक्षा देने का काम कर रही हैं। उन्हें बच्चों को पढ़ाने में काफी अच्छा लग रहा है। वह पढ़ाती तो सिर्फ क्लास 1 से 5 पांच तक के बच्चों को हैं। मगर जो भी पढ़ना चाहे वह आकर उनसे पढ़ सकता है। इसके साथ ही इस काम में शिवानी सिंह का साथ निभा रही महिला अंजू ने बताया उसके बच्चो की पढ़ाई तो छूट चुकी थी। मगर शिवानी सिंह की प्रेरणा से वह बच्चों को फिर से पढ़ाने लगी हैं। जिससे उनके समय का सदुपयोग हो जाता है और यह संतोष भी होता है कि बच्चों की पढ़ाई में रूकावट नहीं है।

शिवानी सिंह के प्रयासों की हर तरफ सराहना

शिक्षिका शिवानी सिंह के मुताबिक बुनियादी शिक्षा को सशक्त बनाने और मिशन प्रेरणा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उन्होंने गांव के शिक्षित युवाओं को पहले छोटी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने का संकल्प दिलाया और फिर उन्हें प्रेरित कियाI। अब यह युवा टोली बनाकर गांव के कई हिस्सों में अलग-अलग बट जाते हैंI इसके लिए यह युवा कोई शुल्क भी नहीं लेते हैंI गांव में बच्चों को पढ़ाने की यह मुहिम धीरे-धीरे और गांवों में भी बढ़ती गयीI यही वजह है कि अब प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका शिवानी के इन प्रयासों की सराहना अब हर कोई करता हैI



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