जापानी खाएंगे टिकरी का मशरूम, जल्द शुरू होगा निर्यात, पूर्वांचल के 25 किसानों को किया जाएगा प्रशिक्षित

वाराणसी. वाराणसी के मशरूम अब जापान, इंडोनेशिया जैसे देशों तक पहुंचेंगे। बीएचयू के पीछे स्थित गांव टिकरी के खेतों में उगाया जाने वाला मशरूम जापान, इंडोनेशिया जैसे देशों में भेजा जाएगा। पूर्वांचल के चार जिलों के विभिन्न गांवों में 25 चिन्हित किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस कड़ी में प्रथम चरण में वाराणसी, सोनभद्र व चंदौली के पांच-पांच व गाजीपुर के दस-दस किसानों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। आगे और किसानों को ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षित किसानों ने ओयस्टर व वटन प्रजाति के मशरूम की खेती की शुरू कर दी है।

पांच गुना मशरूम उत्पादन का लक्ष्य

मशरूम उत्पादन का लक्ष्य पांच गुना निर्धारित किया गया है। दरअसल, प्रतिदिन मशरूम उत्पादन 100 किलो प्रतिदिन के हिसाब से हो रहा है। लेकिन अकेले वाराणसी में ही 500 किलो प्रतिदिन की खपत है। इस प्रकार जनपद में सालाना मशरूम की खपत 36500 किलो की है। जबकि डिमांड 182500 किलो का है। इसे देखते हुए सालभर में मशरूम का उत्पादन पांच गुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसा करने से दूसरे शहरों जैसे दिल्ली, लखनऊ से मशरूम उत्पादन पर निर्भरता भी कम होगी और इसका निर्यात भी बढ़ेगा।

ओयस्टर मशरूम की मांग अधिक

पूर्वी उत्तर प्रदेश में ओयस्टर मशरूम की मांग अधिक है। इसको देखते हुए पूर्वांचल के चार जिलों में इसकी खेती शुरू कर दी गई है। वहीं जापान में मशरूम के सूप की डिमांग है। इसके लिए भी कार्ययोजना तैयार है। पाउडर बनाने का कार्य भी जल्द शुरू किया जाएगा ताकि आने वाले समय में इसका भी निर्यात किया जा सके।

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