कभी मौत बांटता था बाराबंकी का चैनपुरवा गांव, अब इकोफ्रैंडली दियों और मौमबत्ती से बिखेर रहा रोशनी

बाराबंकी. राहजनी कर लोगों को लूटने का काम करने वाले वाल्मीकि से ब्रह्मऋषि वाल्मीकि तक के सफर की कहानी तो सबने सुनी होगी, मगर बाराबंकी में मौत बांटने वाले गांव के लोगों के हाथों से दूसरों के घरों में उजियारा फैलाने की कहानी शायद किसी ने नहीं सुनी होगी। बाराबंकी पुलिस के एक प्रयास ने इस गांव के लोगों की जिन्दगी बदल गई है। जो लोग पुलिस से डर कर अपना काम करते थे वहीं लोग आज पुलिस के प्रयासों से सम्मानजनक काम को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस ग्रामीणों के इस काम में भरपूर सहयोग भी कर रही है। उधर सरकार की ओर से भी इस गांव की महिलाओं को दीपावली की बड़ी सौगात दी गई है। प्रदेश के प्रमुख सचिव ने घोषणा की है कि यहां अधिक से अधिक भी दिए बनाकर सरकार को दे दें, ताकि अयोध्या के दीपोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं उसे प्रज्वलित कर सकें।

 

पहले पुलिस के डर के साये में बीतता था जीवन

बाराबंकी जनपद के थाना मोहम्मदपुर खाला का गांव चैनपुरवा, जो अवैध शराब बनाने के लिए प्रसिद्ध था और पुलिस के डर के साये में उनका जीवन व्यतीत होता था। यह अवैध शराब कभी-कभी लोगों की जान भी ले लेती थी और उनके परिवार के भविष्य में अंधेरे के सिवाय कुछ नहीं बचता था। इसीलिए इस गांव के लोगों को मौत बांटने वाला कहा जाता था, मगर बाराबंकी पुलिस की एक अनोखी पहल ने इनका जीवन ही बदल कर रख दिया और यह जो लोगों के भविष्य में अंधेरा करते थे वह आज घरों को अपने ईकोफ्रेंडली दियों से रोशन करने का काम कर रहे हैं। इन्हें इस काम के लिए प्रेरित किया है बाराबंकी पुलिस ने, अब यह सम्मान के साथ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इस काम में सबसे पहले आगे आई हैं यहां की महिलाएं, जिन्होंने समूह बना कर इस काम को करने का बीड़ा उठाया। दीपावली में इनके पास पूरे जिले से बड़े आर्डर आ रहे हैं, इनके उत्साहवर्धन के लिए पुलिस इन्हें आर्डर भी दिलवा रही है और हर संभव मदद भी कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी दीपोत्सव के लिए दियों का एक बड़ा आर्डर देकर, इस गांव को दीपावली की सौगात दी है।

 

बदल गई गांव के लोगों की जिंदगी

इस गांव की महिलाओं ने बताया उनका यह गांव तराई का गांव है, यहां पास की बहती नदी से उनके घर के पुरुष मछलियां पकड़कर लाते थे और अवैध शराब का निर्माण कर उसका सेवन और बिक्री दोनों करते थे। इस काम में हमेशा पुलिस का डर बना रहता था। इस काम से बचाने के लिए उनका आर्थिक शोषण भी होता था और जिले में अवैध शराब से लोगों के मरने की घटना हुई तो पुलिस के डर से उन्हें गांव भी छोड़ना पड़ जाता था। उनके घर के पुरुष अक्सर जेल में ही रहकर घुटते रहते थे क्योंकि उनके पास जमानत कराने की भी व्यवस्था नहीं होती थी। ऐसे में बाराबंकी पुलिस ने उन्हें अच्छे काम के लिए प्रेरित किया और उन्हें शहद उत्पादन और दिए बनाने की पहले ट्रेनिंग करवाई फिर सरकार से आर्थिक सहायता दिलवा कर उनकी जिन्दगी बदल दी। अब उन्हें पुलिस का कोई डर नही है बल्कि पुलिस खुद इसमें उनका सहयोग कर रही है।

 

मिशन कायाकल्प से बदलाव

वहीं इस बदलाव के असली सूत्रधार बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविद चतुर्वेदी ने बताया कि विश्वास से भय खत्म होता है। चैनपुरवा गांव में मिशन कायाकल्प इसकी नजीर है। पुलिस को देखकर भागने वाले अब गांव की तस्वीर बदलने में सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमने स्थानीय पुलिस के साथ चैनपुरवा गांव में चौपाल लगाई। दो महीने लगातार हर रविवार को चैनपुरवा गए, परिवर्तन का माहौल बनाया। स्वयं-सहायता समूह बना कर उनको मधुमक्खी पालन के लिए मानसिक रूप से तैयार किया. यह समझाया कि अवैध शराब से मधुमक्खी पालन में ज्यादा पैसा मिलेगा, रोज-रोज की जलालत से छुटकारा मिलेगा। गांव की महिलाओं को मधुमक्खी पालन का प्रशि‍क्षण दिलाया गया, जिसके बाद आज यहां अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला और अब चैनपुरवा में बदलाव की मुहिम की गूंज चारों ओर सुनाई पड़ रही है।

 

बाराबंकी के दीयों से जमगम होंगे अयोध्या के घाट

चैनपुरवा में बदलाव की मुहिम की गूंज अयोध्या और लखनऊ सहित कई अन्य जिलों में सुनाई देगी। अवैध शराब के कारोबार से तौबा कर तरक्की की राह चुनने वाली यहां की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बनाए दीयों से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी का चौथा दीपोत्सव और लक्ष्मणनगरी भी जगमग होगी। अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इन्हीं इको फ्रेंडली दीयों को प्रज्जवलित करेंगे। सूरतगंज के चैनपुरवा गांव में महिलाओं ने बीवैक्स से कैंडल दीये तैयार किये। बाराबंकी में दीपोत्सव से मिले प्रोत्साहन के बाद महिलाओं ने अयोध्या और अन्य शहरों में आपूर्ति के लिए करीब तीन लाख दीये तैयार किये। इनमें से इक्कीस हजार दीयों की आपूर्ति अयोध्या को की गई है।

 



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