स्वेटर वितरण के टेंडर में बीएसए ने सहयोगी के साथ मिलकर किया बड़ा फ्राड

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रह रहा है। अभी अनिययमित ढंग से विद्यालयों में की गयी नियुक्ति का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को निः शुल्क स्वेटर वितरण के टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता सामने आ गयी है। बीएसए और जिला समन्वयक ने जिला क्रय समिति के संज्ञान में लाए बिना ही पिछले वर्ष 30 लाख रुपये टर्नओवर की शर्त के स्थान पर तीन करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त और अन्य शर्तो को शामिल कर टेंडर करा दिया। इसके जरिये अधिकारियों पर चहेती संस्थाओं को लाभ पहुंचाने का आरोप है। मामला संज्ञान में आने पर प्रभारी जिलाधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने अनुचित शर्तो को समाहित करते हुए जेम पोर्टल पर अपनाई गई प्रक्रिया के तहत बिड (खरीद प्रक्रिया) को निरस्त कर दिया है। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार एवं जिला समन्वयक बेसिक शिक्षा आरसी चैहान को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।

पिछले दिनों जिलाधिकारी से शिकायत की गयी थी कि शिक्षा विभाग द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों में वितरित होने वाले निःशुल्क स्वेटर की खरीद प्रक्रिया में धांधली की गयी है। अधिकारियों ने मानक में बदलाव कर कुछ विशेष फर्मों को लाभ पहुंचाया है जबकि जो फर्म मानक को पूरा करती थी उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। जांच में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गयी है। जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

प्रभारी जिलाधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने बताया कि बीएसए व जिला समन्वयक बेसिक शिक्षा ने कुछ विशेष लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर योग्य फर्मो को अनुचित तरीके से बिड से बाहर कर दिया। जिला क्रय समिति को भी संज्ञान में नहीं लाया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के टर्नओवर की शर्त के स्थान पर नए टर्नओवर और अन्य शर्तो को समाहित किया गया। जिसकी शिकायत कतिपय फर्मों ने जिलाधिकारी से की थी। जिला क्रय समिति की बैठक में शिकायतों का बिंदुवार परीक्षण किया गया। परीक्षण में पाया गया कि गत वर्ष शर्तो से इतर जाकर संबंधित दोनों अधिकारियों ने अनुचित शर्तों को समाहित करते हुए जेम पोर्टल पर टेंडर की प्रक्रिया अपनाई, जो जिला क्रय समिति के संज्ञान में नहीं रही।

प्रथम दृष्टया यह बड़ी अनियमितता है। दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद जो भी मामले में दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यह टेंडर प्रक्रिया तत्कालीन बीएसए के समय अपनाई गयी थी जिन्हें पिछले दिनों शिक्षक नियुक्ति में अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।

BY Ran vijay singh



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