मुख्तार के बाद अब अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम का नंबर, जब्त होंगी अवैध संपत्तियां

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

आजमगढ़. वर्ष 1993 में मुंबई में हुई सीरियल बम ब्लास्ट के ममाले में उम्रकैद की सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम पर सरकार की नजर टेढ़ी हो गयी है। जेल के भीतर से ही साम्राज्य चला रहे सलेम की बेमानी संपत्तियों की तलाश शुरू हो गयी है। साथ ही अबू सलेम के गुर्गो पर भी प्रशासन की नजर है। इससे डान के करीबी और उसके लिए काम करने वालों की नींद उड़ी हुई है। कारण कि बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गुर्गो का अंजाम देख रहे है। सलेम के नाम पर ठेकेदारी और प्लाटिंग के जरिये करोड़ों की संपत्ति जुटाने वाले अब अपनी संपत्ति बचाने की कवायद में जुटे हुए है।

बता दें कि सरायमीर थाना क्षेत्र के स्थानीय कस्बा के पठानटोला मुहल्ला निवासी अबू सालिम अंसारी कभी मोटरसाइकिल मैकेनिक हुआ करता था। वर्ष 1989 में वह सरायमीर से मुंबई गया और वहां उसे इब्राहिम दाउद की सरपरस्ती मिल गयी। फिर वह अबू सालिम से अबू सलेम बन गया। यही नहीं उसने मुंबई से लेकर लखनऊ तक अपनी सल्तनत खड़ी कर ली।

12 मार्च वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट जिसमें 257 लोग मारे गए और 173 लोग घायल हुए। इस घटना दाउद के इशारे पर अबू सलेम ने साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया। बाद में सलेम और दाउद के संबंध खराब हो गए। दाउद के देश छोडकर भागने के बाद सलेम में न केवल अपनी इंटरनेशल डान के रूप में पहचान बनायी बल्कि अलग सल्तनत भी खड़ी कर ली।

मुंबई कांड के मुख्य आरोपी अबू सलेम को भी खुद को बचाने लिए देश छोड़ना पड़ा लेकिन इससे उसके साम्राज्य पर कोई असर नहीं हुआ। बल्कि उसके लोग ठेकेदारी, हुंडी से लेकर प्लाटिंग के काम में अपना वर्चश्व बढ़ाते गए। मुंबई कांड में सलेम के साथ उसके एक साथी आजमगढ़ जिले के ही गंभीरपुर थाना क्षेत्र के शिवराजपुर गांव निवासी रियाज सिद्दीकी का नाम भी सामने आया था जो ब्लास्ट के कुछ दिन बाद ही गिरफ्तार हो गया था।

सलेम के पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के बाद वर्ष 2017 में न्यायालय ने उसे मुंबई बम कांड में उम्र कैद व उसके साथी रियाज को दस साल कैद की सजा सुनायी। सलेम आज भी जेल में बंद है। अबू सलेम का भाई चुनमुन सरायमीर में रहता है जबकि एजाज अहमद और अबुल जैश लखनऊ में रहते हैं। अबू जैश ने ही सलेम की फर्जी पासपोर्ट बनवाने में मदद की थी। उसके एक भाई की लखनऊ में रेस्टोरेंट एवं प्लाटिंग का काम है। जिले में उसके गुर्गे आज भी सक्रिय हैं। जो प्लाटिंग का काम करते है।

वैसे तो अबू सलेम गांव छोड़ने के बाद कभी खुद सरायमीर नहीं लौटा वर्ष 2007 में उसकी मां के निधन के बाद उनके चालीसवें पर पुलिस अभिरक्षा में सलेम को यहां लाया गया था। उस समय सलेम ने अपने प्रति लोगों की दिवानगी देख जेल से ही चुनाव लड़ने का फैसला भी किया था। रातो रात मुबारकपुर विधानसभा क्षेत्र में उसके पोस्टर लगवा दिये गए थे। सलेम के अधिवक्ता ने मतदाता सूची में उसका नाम शामिल कराने के लिए आवेदन भी किया था लेकिन बात नहीं बनी। फिर उसके चुनाव लड़ने के फैसले पर भी विराम लग गया था।

अबू सलेम को उम्र कैद की सजा होने के बाद भी उसके गुर्गे सक्रिय हैं। 6 अप्रैल 2018 को सरायमीर थाने में उसने प्रर्थना पत्र भेजकर पुलिस ने न्याय मांगा था और आरोप लगाया था कि उसकी पुश्तैनी भूमि को कुछ लोगों ने अपना नाम चढ़वा लिया है। इसके बाद से सलेम की कोई गतिविधि सामने नहीं आयी थी लेकिन अब शासन द्वारा अपराधियों के खिलाफ की जा रही अवैध संपत्ति जब्ती की कार्रवाई से सलेम फिर चर्चा में है। पुलिस सलेम की भी बेमानी संपत्ति को तलाश करने में जुटी है। इससे उसके लोगों में खलबली मची हुई है।

पुलिस उप महानिरीक्षक सुभाष चंद दुबे का कहना है कि पूरे प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों आजमगढ़, मऊ एवं बलिया में कार्रवाई लगातार जारी है। अपराध के जरिये दौलत कमाने तथा अचल संपत्ति बनाने वालों की संपत्ति जब्त की जा रही है। यह कार्रवाई भी उसी का हिस्सा है। जो भी गलत करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी चाहे वह जो भी हो।

BY Ran vijay singh



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