न कोरोना का डर, न आदेश का असर, दिवाली पर आतिशबाजी से गंभीर श्रेणी में पहुंचा कई शहरों का एक्यूआई

बोहवाके बावजूद यूपी में जमकर आतिशबाजी की गई। जिसका असर ये रहा कि पिछले कई दिनों से 300 के स्तर पर होने वाला एक्यूआई 400 पार के खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया। एनजीटी ने राजधानी लखनऊ समेत यूपी के 13 शहरों में पटाखों की बिक्री और जलाने पर बैन लगाया था। इसके बावजदू धड़ल्ले से सूबे में पटाखों की बिक्री व आतिशबाजी की गई। हालांकि, नियमों का थोड़ा बहुत ध्यान रखते हुए इस बार हर तरह के पटाखे नहीं बेचे गए। ज्यादातर लोगों ने फुलझड़ी जलाकर ही अपनी दिवाली मनाई।

कानपुर सबसे प्रदूषित

जिला और पुलिस की लापरवाही की वजह से लोगों में पर्यावरण को लेकर कोई चिंता नहीं दिखी। लखनऊ वासियों ने एनजीटी और प्रशासन के आदेश को ताक पर रख कर रात भर जमकर आतिशबाजी की। राजधानी के सभी क्षेत्रों में खूब पटाखे जलाए गए। आतिशबाजी की वजह से वायु प्रदूषण खतरनाक हो गया, जिसकी वजह से सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ। लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स 441 हो गया। इससे भी बुरा हाल पड़ोसी शहर कानपुर का रहा। यहां शाम तक तो लोगों ने खूब संयम बरता लेकिन रात नौ बजे के बाद 522 एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) पर पहुंच गया, जोकि खतरनाक स्तर है। हालांकि पिछली दीपावली की अपेक्षा प्रदूषण करीब 40 प्रतिशत से कम रहा। ऐसा ही कुछ आगरा, मेरठ, कानपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, नोएडा में भी देखने को मिला। मुरादाबाद में 411, मेरठ और आगरा में भी 400 के पार पहुंच गया।

एनसीआर में भी हवा खराब

दिल्ली में भी मनाही के बावजूद पटाखे फोड़े गए। शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया। पराली और पटाखों के चलते दिल्ली में आबोहवा और ज्यादा खराब हो गई। आंकड़ों के मुताबिक नोएडा में एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 के पार चला गया.।वहीं राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में हवा का स्तर बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया।



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