प्रसूताओं को अस्पताल से डिस्चार्ज करते समय अब स्वास्थ्य विभाग अपनाएगा ये रस्म

मेरठ. जनसंख्या नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग कई तरीके अपना रहा है। शासन के निर्देश पर अब मेरठ समेत प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं को डिस्चार्ज के वक्त खोइछा प्रथा की रस्म अदा करने के आदेश हुए हैं। इससे परिवार नियोजन को बढ़ावा देने की कोशिश होगी। प्रसव के बाद प्रसूता जब अस्पताल से प्रसूता डिस्चार्ज होंगी, तो उनके आंचल में टीकाकरण कार्ड, परिवार नियोजन विधि संबंधित दस्तावेज, दवाएं, पंपलेट, आईसीसी फोल्डर और फॉलोअप कार्ड रखा जाएगा। उन्हें सम्मान के साथ अस्पताल से विदा किया जाएगा।

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दरअसल, स्वास्थ्य कर्मचारी प्रसूताओं को प्रेरित करेंगे कि नियोजन करके कैसे वह अपने परिवार को खुशहाल बना सकती हैं। आदेश के क्रियान्वयन पर काम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर खुशहाल दिवस का भी आयोजन किया जा रहा है। एसीएमओ डाॅ. पूजा शर्मा ने फीता काटकर इस दिवस का उद्धाटन किया। इस दौरान डाॅ. पूजा शर्मा ने बताया कि परिवार नियोजन की जानकारी देने के लिए खुशहाल दिवस का आयोजन किया जाता है। इसमें परिवार नियोजन की जानकारी देने के साथ ही संबंधित सेवाएं भी निशुल्क प्रदान की जाती हैं।

एसीएमओ डाॅ. पूजा शर्मा ने बताया कि यह प्रथा जनसंख्या नियंत्रण व मातृ-शिशु की मृत्यु दर रोकने के लिए सहायक सिद्ध होगी। प्रसव पश्चात वार्ड में एक अलग चेंबर बनाया गया है। वहां से प्रत्येक प्रसूता को अस्पताल से छुट्टी के वक्त परिवार नियोजन की पूरी जानकारी दी जाएगी। वहीं लोगों को नसबंदी, गर्भावस्था प्रसव के समय और उसके बाद स्वास्थ्य के देखभाल को भी प्रेरित किया जाएगा।

ये है खोइछा प्रथा

शादी के बाद कन्या की विदाई के वक्त दुल्हन के आंचल में अक्षत, हल्दी, गुड़, दुर्वा व द्रव्य डालने का रिवाज है। दंपती के मंगलकामना की आस में ऐसा किया जाता है। इसी तरह अब स्वास्थ्य विभाग भी खोइछा प्रथा को अपनाएगा। जिले में इसकी शुरूआत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से की जाएगी।

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