बंदियों ने सरकार को बना दिया कर्जदार, जेल में छह माह से मजदूरी का नहीं आया बजट

फिरोजाबाद। कोरोना काल में सरकार बंदियों की कर्जदार हो गई। इसकी वजह है कि उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की जिला जेल में काम करने वाले बंदियों को मेहनत की मजदूरी नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह कोरोना के चलते विगत छह माह से जेल में मजदूरी का रुपया सरकार से नहीं आया है।

250 बंदी और कैदियों का है बकाया
उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद जेल में करीब 250 बंदी और कैदी हैं। जिनके द्वारा जेल में मेहनत मजदूरी की जाती है। जेल में काम करने वालों को सरकार द्वारा धनराशि भी प्रदान की जाती है। बंदी मजदूरों का करीब 10 लाख 50 हजार रुपया जेल प्रशासन पर बकाया चल रहा है। कई बंदी ऐसे भी हैं जो काम करने के बाद जेल से जमानत पर बाहर आ गए हैं।

19 बैरकों में हैं 1600 बंदी—कैदी
फिरोजाबाद की जेल में 19 बैरकों के अंदर 1600 बंदी और कैदी हैं। इनमें करीब 400 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें से 250 कैदी मेहनत मजदूरी करते हैं। बंदी और कैदियों को प्रतिदिन करीब पांच से छह घंटे काम करना पड़ता है जिसके एवज में सरकार से उन्हें मेहनताना मिलता है। जेल में अकुशल श्रेणी के लोगों को 25 रुपए प्रतिदिन, अद्र्धकुशल लोगों को 30 और कुशल श्रेणी के लोगों को 40 रुपए की दर से मेहनताना मिलता है।

छह माह से नहीं आया पैसा
सरकार का मानना है कि जेल में निरुद्ध बंदी मेहनत करके इतना कमा सकते हैं कि बाहर जाकर छोटा मोटा काम शुरू कर सकते हैं और आपराधिक गतिविधियों से तौबा कर सकते हैं। सरकार द्वारा जेल को 1.75 लाख रुपए प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है लेकिन इस बार कोरोना के चलते पैसा नहीं आ सका है। जेल अधीक्षक मोहम्मद अकरम खान का कहना है कि मजदूरी का 500 रुपए तक कैश मिलता है इससे अधिक होने पर खाते में भेजा जाता है। बजट आते ही पैसा खातों में भेज दिया जाएगा।