किसानों और सरकार के बीच फिर होगी बात, जानिए कहां अटकी है बात और क्या होगा अब नया बदलाव?

केंद्र सरकार द्वारा बनाए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरध का पिछले एक महीने से जारी है. दिसंबर की इस कड़ाके की ठंड में किसान दिल्ली से सटी सीमाओं पर हजारों की संख्या में खुले आसमान के नीचे आंदोलन परर डटे हुए हैं. अब तक सरकार और किसानों के बीच कई बार वार्ता हुई लेकिन इस समस्या का हल नहीं निकला.

जहां एक तरफ सरकार किसानों को समझाने का प्रयास कर रही है कि ये कानून उनके फायदे के लिए बनाए गए वहीं दूसरी तरफ किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इस दौरान आंदोलन के  एक बार फिर केंद्र सरकार ने किसानों को एक चिट्ठी लिखी और फिर से बातचीत का न्योता दिया. ऐसे में सबकी इस वार्ता पर सबकी नजर रहेगी.और सब यही दुआ कर रहे हैं कि इस बार कुछ हल निकल आए.

जानकारी के लिए बता दें कि गुरुवार को कृषि मंत्रालय की ओर से किसानों को जो चिट्ठी लिखी गई है. उसमें कहा गया कि किसान संगठनों द्वारा सभी मुद्दों पर सरकार बातचीत और समाधान करने के लिएप्रतिबद्ध है. इतना ही नहीं सरकार ने अपनी चिट्ठी में इस बात को भी स्पष्ट किया है कि नए कानूनों का MSP से मतलब नहीं है, ऐसे में इन कानूनों से MSP पर कोई असर नहीं होगा.

गौरतलब है कि किसानों की ओर से पहले ही सरकार द्वारा भेजे गए लिखित संशोधनों को नकार दिया गया था, लेकिन अब जब बातचीत का न्योता फिर से भेजा गया है तो किसान इस बात पर विचार कर रहै है और इसी क्रम में आज यानी शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर सभी किसान संगठनों की बैठक होनी है.