28 वर्ष बाद श्री रामलला को मकर सक्रांति पर खिलाई जाएगी घी, पापड़ व खिचड़ी

अयोध्या : रामलला के अस्थाई मंदिर में शिफ्ट किए जाने के बाद पहली बार मकर संक्रांति पर भगवान रामलला को विधि विधान के साथ खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई है और कल दोपहर 11:30 बजे मकर संक्रांति के मौके पर भगवान रामलला को खिचड़ी दही पापड़ और घी के साथ भोग लगाया जाएगा रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि 11:00 बजे मंदिर बंद होगा और प्रत्येक वर्ष की भांति 11:30 बजे रामलला को खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा इसके लिए प्रबंध तंत्र के द्वारा तैयारियां पूरी कर ली गई हैं भगवान को खिचड़ी का भोग लगाने के बाद उनका प्रसाद दर्शन आने वाले श्रद्धालुओं को तथा रामलला की सुरक्षा में लगे हुए सुरक्षा बलों में वितरित किया जाएगा

अयोध्या विवाद पर फैसला आने के बाद से ही राम लला के परिसर में उत्सव और सेवइयां भगवान के राग भोग पूरे विधि विधान से किए जा रहे हैं इस परिपेक्ष में साल भर में जो भी तीज और त्यौहार पढ़ रहे हैं उस पर्व पर भगवान के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं श्री राम जन्म भूमि पर भगवान के समस्त त्योहारों को उत्साह पूर्वक मनाया रहा है रामलला के परिसर में 28 वर्षों के बाद भगवान राम लला को विधि विधान के साथ खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा और मकर संक्रांति के मौके पर दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं तथा रामलला के सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बलों के बीच में वितरित किया जाएगा

रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि खिचड़ी का भोग प्रत्येक वर्ष रामलला को लगाया जाता था परंतु विधि विधान से इस बार विशेष तरीके से तैयारियां की गई हैं और मंदिर प्रबंधन तंत्र से जुड़े हुए लोगों ने भगवान के राग भोग की तैयारियां पूर्ण कर ली है। 1.30 पर पूरे विधि विधान के साथ मकर संक्रांति का पर्व रामलला के परिसर में मनाया जाएगा उनका कहना है मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं इसी दिन संक्रांति का पर्व मनाया जाता है और कल मकर संक्रांति है हालांकि कुछ लोगों में यह मानना है कि बृहस्पतिवार को खिचड़ी नहीं बनाई जाती परंतु इस पर भी रामलला के प्रधान पुजारी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि मकर राशि पर सूर्य के प्रवेश का पर्व है मकर संक्रांति क बाद से ही सारी शुभ काम शुरू हो जाएंगे इस दिन दिल का कोई महत्व नहीं होता इसलिए हाथ से बृहस्पतिवार को भी खिचड़ी बनाई जा सकती है और उसे भगवान को भोग लगाकर उस को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है।



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