कृषि कानूनो को लेकर SC के कमेटी बनाए जाने के फैसले पर देखिए क्या बोले कमेटी अध्यक्ष अनिल घनवत

कृषि कानूनों को लेकर किसान सवा महीने से ज्यादा का समय हो गया है और वो अभी भी दिल्ली के बॉर्डर पर डटे है औऱ अपना धरना प्रदर्शन कर रहे है. वही सरकार के द्वारा भी किसानों को लगातार समझाने की कोशिश की जा चुकी है लेकिन उसका किसानों पर कोई असर नहीं पड़ा. वही दूसरी तरफ सरकार और किसान संगठनों के बीच कई दौर की वार्ता भी असफल साबित हुई है. ऐसे में इस मामले में सुप्रीमकोर्ट ने कल तीनो कृषि कानूनों के लागू होने पर अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है. साथ ही चार सदस्यों की एक कमेठी बनायीं है.

वही इस कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवत, दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री तथा कृषि लागत और मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी शामिल हैं. अब SC के इस फैसले पर कमेठी के अध्यक्ष अनिल घनवत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

दरअसल ANI से मिली जानकारी के मुताबिक अनिल घनवत ने कहा कि ‘विरोध करने वाले किसानों को न्याय मिलेगा.’  साथ ही साथ उन्होंने ये भी कहा, ‘यह आंदोलन कहीं रुकना चाहिए और किसानों के हित में एक कानून बनाया जाना चाहिए. पहले हमें किसानों को सुनने की जरूरत है, अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) के बारे में उनकी कोई गलत धारणा है, तो हम उस पर रुख साफ करेंगे.’ इसके अलावा घनवत ने कहा कि ‘कई किसान नेता और यूनियनें एपीएमसी के एकाधिकार से आजादी चाहती हैं. इसे रोकने की जरूरत है और किसानों को अपनी फसल बेचने की आजादी दी जानी चाहिए. यह पिछले 40 साल की मांग है. जो किसान चाहते हैं कि वह मंडी में एमएसपी पर फसल बेचेंगे और जा चाहते हैं एपीएमसी की मोनॉपली खत्म हो, उन्हें भी विकल्प दिया जाना चाहिए.’ जाहिर है की अभी तक किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म नहीं हुआ है.



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