यूपी की जेलों में सबसे ज्यादा कैदी बंद, अनपढ़ कैदियों की संख्या में भी अव्वल

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश समेत हर राज्य की जेलों में 4,78600 कैदी अपने अपराधों की सजा काट रहे हैं जिसमें 27.37 फीसदी कैदी अनपढ़ है जोकि ‘क ख ग’ लिखना तक नहीं जानते है। इन 1,32,729 अनपढ़ कैदियों में से सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद है, जहां 31,927 कैदियों को अपना नाम तक लिखना नहीं आता है। इतना ही नहीं जनसंख्या के हिसाब से देश का नंबर एक राज्य उत्तर प्रदेश है। यहां जेलों में बंद कैदियों की संख्या के हिसाब से भी सबसे अव्वल पाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के डाटा के हिसाब से यूपी की जेलों में सबसे ज्यादा 1,01,297 कैदी सजा काटने के लिए बंद हैं।

आंकड़ों के मुताबिक लैंगिक आधार पर देखा जाए तो महिलाओं में 13,416 हिंदू, 3,162 मुसलमान, 721 सिख, 784 ईसाई और 261 अन्य थीं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के लिहाज से उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 72,512 हिंदू और 27,459 मुसलमान कैदी जेलों में बंद हैं। पंजाब में सबसे अधिक 12,778 सिख, 1640 ईसाई और 915 अन्य जेलों में कैद हैं। वहीं श्रेणी के आधार पर देखा जाए तो देश की जेलों में बंद 4,78,600 कैदियों में से 3,15,409 (65.90 फीसद) अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित हैं जबकि अन्य श्रेणी से आने वाले कैदियों की संख्या 1,26,393 है। सबसे अधिक 1,62,800 (34.01 फीसद) कैदी ओबीसी, 99,273 (20.74 फीसद) एससी और 53,336 (11.14 फीसद) एसटी श्रेणी से संबंध रखते हैं।

27.37 फीसद कैदी अशिक्षित

मंत्रालय के मुताबिक, जेलों में बंद 1,98,872 कैदियों ने कक्षा 10 से कम, 1,03,036 ने कक्षा-10 से ज्यादा पर स्नातक से कम, 30,201 ने स्नातक डिग्री और 8085 कैदियों ने पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल की है। कम से कम 5677 कैदी तकनीकी डिग्री या डिप्लोमा की योग्यता रखते हैं। उत्तर प्रदेश में 31,927 अनपढ़ कैदियों के अलावा 36,390 ने कक्षा 10 तक, 21,269 ने स्नातक से नीचे, 8,151 ने स्नातक, 2,635 ने पोस्ट ग्रेजुएट और 925 ने तकनीकी डिग्री हासिल की है।

बढ़ सकता है कैदियों का आंकड़ा

गृह मंत्रालय के अनुसार कि पश्चिम बंगाल ने साल 2018 और 2019 में अपने यहां की जेलों का आंकड़ा केंद्र के साथ साझा नहीं किया है। इसके चलते बंगाल के 2017 के आंकड़ों को ही आधार बनाया गया है, जबकि महाराष्ट्र की तरफ से श्रेणीवार ब्योरा नहीं दिया गया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी की तरफ से हाल ही में संसद में पेश किए गए ये आंकड़े नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डाटा पर आधारित है, जिसमें 31 दिसंबर, 2019 तक की जेलों की स्थिति पेश की गई है। इस लिहाज से देखा जाए तो यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

जानिए किस श्रेणी के कितने कैदी

27.37 फीसदी कैदियों को नहीं आता है पढ़ना
41.55 फीसदी कैदियों पढ़े हैं कक्षा-10 से कम
21.52 फीसदी कैदी पढ़े हैं स्नातक स्तर से नीचे
6.31 फीसदी के पास मौजूद है स्नातक डिग्री
1.68 फीसदी कैदियों ने पीजी की डिग्री की है हासिल
1.18 फीसदी कैदियों पर है तकनीकी डिग्री या डिप्लोमा