सामना में शिवसेना का ये कैसा संपादकीय? वि’वा’दि’त लेख में साधा सुप्रीम कोर्ट पर निशाना, लिखा- ‘अदालत भी कर रही है मोदी…

सामना में शिवसेना का ये कैसा संपादकीय? अगर आपके मन में भी ये सवाल आ रहा है तो ये सवाल आना लाजमी है, चूंकि इस मुखपत्र सामना के जरिए शिवसेना का वि’वा’दि’त लेख लिखने का ट्रेंड चल रहा है और इस बार तो सभी हद पार करते हुए शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट पर ही नि’शा’ना साध दिया.

दरअसल, आं’दो’ल’न का धिकार निरंकुश नहीं है. कभी भी, कहीं भी आंदोलन नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिेए कोर्ट पर निशाना साधा है. सामना (Samana Editorial) ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख से सरकार के ही ‘मन की बात’ सामने आई है क्या? चार दिन पहले ही हमारे पीएम मोदी ने देश के आंदोलन का मजाक उड़ाया था.

उन्होंने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि कुछ लोग केवल आंदोलन पर ही जीते हैं. ये लोग ‘आंदोलनजीवी’ हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी पीएम मोदी के सुर में सुर मिलाते हुए आंदोलनकारियों को आंख दिखाई है. मालूम हो कि कभी महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना पिछले एक साल से भाजपा और पीएम मोदी पर जमकर ह’म’ला’वर है. इतना ही नहीं शिवसेना के सांसद संजय राउत आए दिन बीजेपी पर तं’ज कसते रहते हैं लेकिन इस बार बीजेपी विरोध में शिवसेना ने सर्वोच्च न्यायालय पर ही निशान साध दिया है.

सामना (Samana Editorial) ने आगे देश में कई मुद्दों का हवाला देते हुए लिखा- जब केंद्र सरकार के वि’रो’ध में आंदोलन किया तो कोर्ट `ऑर्डर…ऑर्डर’ करते हुए दे’श’द्रो’ह का हथौड़ा उनके सिर पर मारेगी क्या? ‘हिंदुस्थानी न्याय-व्यवस्था की हालत जी’र्ण हो चुकी है. न्यायालय में न्याय मिलना मुश्किल हो गया है.’वह इतना ही बोलकर नहीं रुके. उन्होंने कहा, ‘हम खुद किसी भी न्यायालय में नहीं जाएंगे. न्यायालय में जाना मतलब पश्चाताप करने जैसा है.’