सांवले रंग पर टिप्पणी से परेशान छात्र ने 15वीं मंजिल से कूदकर जान दी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नाेएडा ( latest noida news ) नमहागुन मॉडर्न सोसाइटी में 11वीं कक्षा पढ़ने वाले 17 साल के संयम ने 15वी मंजिल से कूदकर जान दे दी। संयम पढ़ाई में होशियार था और मिलनसार भी था लेकिन उसका रंग सांवला था। इसी काे लेकर लाेग अक्सर किसी ना किसी बहाने से उस पर टिप्पणी करते थे। आशंका जताई जा रही है कि इन्ही तानाें से परेशान हाेकर उसने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया।

यह भी पढ़ें: युवक ने लगाई झील में छलांग गाेताखोर तलाश लगे

घटना के बाद से छात्र के परिजनाें में काेहराम मचा हुआ है। परिवार वालाें काे कहना है कि अपने सांवले रंग को लेकर संयम तनाव में रहता था उसने अवसाद के चलते सेक्टर-78 स्थित महागुन मॉडर्न सोसाइटी की 15वीं मंजिल से कूदकर जान दी है। सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को मामले को सूचित कर परिजनों को इसके बारे में बताया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस भी सांवले रंग को इसी वजह से आत्महत्या की आशंका जता रही है लेकिन जांच की जा रही है।

यह भी पढ़ें: पिंजरे में कैद हुआ किसान के बेटे काे निवाला बनाने वाला आदमखोर गुलदार

( student suicide ) संयम ने आधी रात काे किसी समय आत्महत्या की। सुबह जब सोसाइटी के लोग वॉक पर निकले तब उन्हें घटना की जानकारी मिली। सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को मामले को सूचित किया मौके पर पहुंची कोतवाली 49 पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। छात्र संयम के कमरे से सुसाइड नोट नहीं मिला है। संयम के परिजनों का कहना है कि वह अपने सांवले रंग को लेकर तनाव में रहता था। हाल ही में उसके रंग पर किसी ने टिप्पणी कर दी थी जिससे वह परेशान था। पुलिस इसी वजह से आत्महत्या की आशंका जता रही है।

यह भी पढ़ें: दहेज लोभियों की भेंट चढ़ गई एक और विवाहिता, फांसी पर लटका मिला शव

एडीसीपी नोएडा ज़ोन रणविजय सिंह पारिवारिक कारणों के चलते संयम के माता-पिता अलग रहते हैं। उसकी माता गुरुग्राम में रहती हैं जबकि पिता नोएडा में सेक्टर-142 स्थित मोबाइल कंपनी में नौकरी करते हैं। संयम अपनी मां के पास रहता था। लॉकडाउन के बाद वह पिता के पास आया था। आत्महत्या का कारण जानने के लिए पुलिस ने उसके पिता प्रशांत और उसकी माता से पूछताछ की तो सामने आया कि वह पिछले काफी समय से अपने सांवले रंग को लेकर तनाव में था। इसको लेकर वह तरह-तरह की बातें करता था। खुद के बारे में हीन भावना से सोचता था। इसको लेकर परिजनों ने उसे समझाया भी था लेकिन काले रंग के चलते अवसाद के चलते उसने अपनी जान दे दी।