Ayodhya : एक ऐसा स्थान जहां पूजा के बिना नहीं होता शुभ काम

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
अयोध्या. राम नगरी अयोध्या के रामकोट क्षेत्र में भगवान श्री राम के जन्म स्थान है लेकिन इस रामकोट में एक ऐसा भी स्थान है जिनकी पूजा बिना कोई भी शुभ कार्य इस क्षेत्र में नहीं किया जाता है। और वर्ष में एक बार होली केे बाद पहले मंगलवार को मेला लगता है जहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। राम जन्म स्थान के रामकोट क्षेत्र उत्तर दिशा में विराजमान भगवान मतगजेंद्र है जिन्हें अयोध्या के कोतवाल भी माना जाता है।

विभीषण के पुत्र भगवान मतगजेंद्र पौराणिकता ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री राम जब लंका विजय के बाद अयोध्या वापस आ रहे थे तो उनके साथ आने वाले समूह में मतगजेंद्र भी शामिल थे। लंका विजय को लेकर अयोध्या में चार महीने तक विजय और भगवान राम के साथ समुचित समय व्यतीत करने के बाद वे सभी अपने घरों को लौट गए पर हनुमान जी नहीं गई और विभीषण भगवान राम के प्रति अत्यंत कृतज्ञ थे पर लंका के राज्य संचालन की जिम्मेदारी के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा। लेकिन विभीषण ने भगवान राम की सेवा में अपने यशस्वी पुत्र मतगजेंद्र को अयोध्या में ही छोड़ दिया।

पुराण कहता है कि मतगजेंद्र भगवान राम के प्रमुख में से एक थे और 10 हजार वर्ष तक शासन के बाद भगवान राम ने जब साकेत जाने की तैयारी की, तो हनुमान जी को अयोध्या का राजा और मतगजेंद्र को अयोध्या की सुरक्षा के लिए अयोध्या के कोतवाल के रूप में का दायित्व सौंपा। और आज भी भगवान गजेंद्र बाबा स्थान रामकोट पर हैं। माना जाता रहा कि यह स्थान भगवान राम के महल का मुख्य द्वार था जिसके कारण आज भी भगवान मत गजेंद्र को अयोध्या के कोतवाल के रूप में पूजा की जाती है और साल में एक बार होली के बाद पढ़ने वाले मंगलवार को भव्य मेला का आयोजन होता है।