मिशन प्रेरणा से एडेड स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर राज्य सरकार रखेगी नजर, सभी जिलों में आदेश जारी

लखनऊ. राज्य सरकार (UP Government) अब एडेड स्कूल में पढ़ाई की गुणवत्ता पर नजर रखेगी। अभी तक सरकार इन स्कूलों में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वेतन देती है। अब पढ़ाई की गुणवत्ता मांपने के लिए मिशन प्रेरणा अभियान चलाया जाएगा। राज्य सरकार ने एडेड स्कूलों की जनशक्ति निर्धारण भी नए सिरे से की है। इसके तहत अब सरकार यहां मिशन प्रेरणा लागू करेगी और यहां के विद्यार्थियों को एक तय लक्ष्य के अनुसार न्यूनतम लर्निंग गोल को प्राप्त करना होगा। यहां विद्यार्थियों के सीखने के लिए वे सभी मॉड्यूल लागू होंगे जो सरकारी स्कूलों में चलाए जा रहे हैं। इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी जिलों में आदेश भेज दिया है।

प्रदेश में लगभग आठ हजार एडेड स्कूल हैं। इनमें 570 प्राइमरी, 7,682 जूनियर स्कूल हैं, जहां के शिक्षकों का वेतन राज्य सरकार के खाते से जाता है। अब नए सिरे से जनशक्ति निर्धारण होने के बाद पढ़ाई की गुणवत्ता उसी आधार पर मांपी जाएगी। इसके साथ ही यहां के विद्यार्थियों का आधार सत्यापन भी करवाया जाएगा। साथ ही यहां दी जा रही निशुल्क यूनिफॉर्म का सत्यापन पहले स्कूल स्तर से करवाया जाएगा और फिर अधिकारी इसकी जांच करेंगे। सभी अध्यापकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका भी मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन की जा रही है। इसके ऑनलाइन होने के बाद यहां के शिक्षकों को भी छुट्टियां ऑनलाइन ही लेनी होगी।

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क्या है मिशन प्रेरणा

उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों के बेसिक शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि अगर बच्चों की शिक्षा प्रारंभिक स्तर पर मजबूत होगी, तो उन्हें माध्यमिक और उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने में आसानी होगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मिशन प्रेरणा की शुरुआत की है।

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