समाजवादियों के गढ़ में ओवैसी से खोला मुस्लिम कार्ड, सपा-बसपा की बढ़ी बेचैनी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. पिछले तीन दशक से समाजवादियों का गढ़ बन चुके आजमगढ़ में भागीदारी संकल्प मोर्चा ने त्रिस्तीय पंचायत चुनाव में मुस्लिम कार्ड खेलकर सपा बसपा की बेचैनी बढ़ा दी है। कारण कि इन्हीं मतदाताओं के भरोसे दोनों दल पंचायत चुनाव में बड़ी जीत का सपना देख रहे थे। अब उनकी राह आसान नहीं दिख रही है। कारण कि सपा बसपा, कांग्रेस और भाजपा अब तक अपने प्रत्याशियों को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई हैं जबकि मोर्चा द्वारा जिला पंचायत के 23 प्रत्याशियों की सूची जारी की जा चुकी है जिसमें 13 मुुस्लिम प्रत्याशी हैं।

बता दें कि सभी राजनीतिक दल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को यूपी की सत्ता का सेमीफाइनल मान रहे हैं। पहली बार सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव में समर्थित प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। राजनीतिक दलों का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सीटों पर कब्जा करना है ताकि वे जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा कर सके। सभी को जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है।

इस बार चुनाव थोड़ा अलग इसलिए भी है कि ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा, ओवैसी की एआईएमआईएम नौ छोटे दलों के साथ भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाकर मैदान में उतरी है। अब तक किसी बड़े दल ने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है लेकिन भागीदारी संकल्प मोर्चा ने होली से पहले ही जिला पंचायत की 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिये है।

यदि देखा जाय तो मोर्चे ने पटवध कौतुक सीट से माया सिंह पत्नी वरुण सिंह को मौदान में उतारा गया है। इसके अलावा सराय सागर मालटारी से मोहम्मद अशरफ खान, बेरमा से रामचंद्र, चांदपट्टी से जुबैदा बानो, मधनापार से मालती देवी, भगतपुर से सुहेल अहमद, जैराजपुर से कौशल्या देवी, शमशाबाद से मोहम्मद आजम, मित्तूपुर से शांति देवी, पवई से बालचंद्र यादव, बागबहार से जुनैद अहमद, मकसुदिया से शाहीन बानो, फूलपुर से शगुफ्ता, राजापुर से लालजीत राजभर, मुंडियार एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष अब्दुल रहमान उर्फ पप्पू, राजापुर सिकरौर से फरहत शारिक, सेठवल से मोहम्मद फैजान खान, फरिहा से सायरा, आंवक से इनामुल्लाह शेख, मंगरावां रायपुर से अब्दुल करीम, बैरीडीह से रहमतुल्लाह खान, इब्राहिमपुर से जितेंद्र व गजहड़ा से कमर कमाल एडवोकेट को जिला पंचायत सदस्य का उम्मीदवार बनाया गया है। इन 23 उम्मीदवारों में 13 मुस्लिम हैं।

मोर्चा ने मुस्लिम बाहुल्य सीटों से ही मुसलमान प्रत्याशियों को उतारा है। इसे मोर्चे का मुस्लिम कार्ड माना जा रहा है। कारण कि मुस्लिम मतदाताओं के दम पर ही सपा और बसपा गांव की सत्ता हासिल करना चाह रही थी। यहीं नहीं कांग्रेस को भी इन्हीं मतदाताओं के भरोसे अच्छे प्रदर्शन की आस थी। मोर्चे के इस दाव से इन दलों की बेचैनी बढ़ी है। कारण कि अभी डेढ़ दर्जन ऐसी सीटें है जो मुस्लिम बाहुल्य है। यहां भी मोर्चा मुस्लिम उम्मीदवारों पर दाव लगा सकता है। जो इनकी मुसीबत को और बढ़ाने वाला है। मुस्लिम कार्ड पर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत माहुली का कहना है कि मोर्चे ने समाज के सभी तबकों को साथ लेकर चलने का फैसला किया है। हमारा मोर्चा सक्युलर मोर्चा है। हमारी पहली सूची देखी जा सकती है हमने सभी को प्रतिनीधित्व देने का प्रयास किया है। अभी तमाम सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा बाकी है। जो छूटे है उन्हें मौका मिलेगा।

BY Ran vijay singh