भद्रा में नहीं प्रदोष काल में करें होलिका दहन, शुभ मुहूर्त सहित जानें कई जरूरी बातें

लखनऊ. फागुन आया है। होली की तैयारियां जोरों पर हैं। होली 2021 खेलने से पहले होलिका दहन (Holika Dahan 2021 Date) किया जाता है। इस बार होलिका दहन कब है? यह सवाल सभी जेहन में तैर रहा है। इस बार होलिका दहन का पर्व 28 मार्च को मनाया जाएगा। 29 मार्च को रंगवाली होली खेली जाएगी।

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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (Holika Dahan 2021 shubha Muhurat) कब है?

लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी मशहूर ज्योतिषचार्य अजय श्रीवास्तव ने होलिका दहन (Holika Dahan Muhurat) के बारे में बताते हैं कि, 28 मार्च को होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा। दोपहर 1 बजे भद्रा खत्म हो जाएगी। भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। रविवार को प्रदोष काल (Holika Dahan Time) में शाम 6 बजकर 37 मिनट से 8 बजकर 56 मिनट के बीच होलिका दहन कर सकते हैं। होलिका दहन के दिन कई शुभ योगों बने हैं, जिसमें से सर्वोत्तम योग सर्वार्थ सिद्धी योग भी लगा हुआ है।

होलिका दहन पर कैसे करें पूजा (Holika Dahan Puja Vidhi)?

ज्योतिषचार्य अजय श्रीवास्तव बताते हैं कि, जिस स्थान पर होलिका दहन होना है, उस स्थान को पहले साफ-सुथरा करें। गंगाजल से पवित्र करें। फिर वहां सूखे उपले, सूखी लकड़ी, सूखी घास आदि रखें। तत्पश्चात पूर्व दिशा की तरफ मुख करके बैठें। अगर इच्छा हो तो गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं भी बना सकते हैं। भगवान नरसिंह की पूजा करें।

अजय श्रीवास्तव आगे बताते हैं कि, पूजा करने के लिए एक लोटा जल, माला, चावल, रोली, गंध, मूंग, सात प्रकार के अनाज, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल, होली पर बनाए गए पकवान व नारियल लें। साथ में नई फसलें जैसे चने की बालियां, गेहूं की बालियां लें। कच्चे सूत को होलिका के चारों तरफ तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटें। फिर सभी सामग्री होलिका दहन की अग्नि में अर्पित करें।

सबसे प्रमुख है कि इस वक्त ये मंत्र (Holika Dahan Mantra) पढ़ें- अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।। और पूजन के पश्च्यात अर्घ्य अवश्य दें। यह मंत्र आपके सभी कष्ट दूर करेगा।

होली से पहले पूजा विधि:- ज्योतिषचार्य अजय जी बताते हैं कि होली के दिन प्रातकाल नित्‍य कर्मों से निवृत्‍त होकर पितरों और देवताओं का पूजन करें। होलिका की राख की वंदना करके उसे अपने शरीर में लगा लें। इसके बाद मां पृथ्‍वी को प्रणाम करें। सभी पितरों को नमन करते हुए ईश्‍वर से प्रार्थना करें कि वह आपके जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखें।