किसानों को बड़ी राहत, एक अप्रैल से शुरू होगी गेहूं खरीद, अब तक एक लाख से हो गए पंजीकरण

लखनऊ. यूपी में एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी। करीब छह हजार क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीदा जाएगा। खाद्य आयुक्त मनीष चौहान के अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना (एमएसपी) के अंतर्गत प्रदेश में किसानों से सीधे गेहूं की खरीद 1975 रुपये प्रति क्विंटल दर से एक अप्रैल से शुरू होकर 15 जून तक चलेगी। क्रय केंद्रों पर सुबह नौ बजे से लेकर शाम छह बजे तक गेहूं खरीदा जा सकेगा। इस समिति में प्रगतिशील किसान भी सदस्य होंगे। समिति द्वारा अस्वीकृत किए जाने के बाद गेहूं की बिक्री नहीं हो सकेगी। बता दें कि एक मार्च से गेहूं खरीद के लिए खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण शुरू हो गया है।

सहकारिता विभाग द्वारा स्थापित होगा सबसे अधिक क्रय केंद्र

सहकारिता विभाग द्वारा सबसे अधिक केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खाद्य आयुक्त ने कहा कि खाद्य विभाग की विपणन शाखा के 1100, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के 300, राज्य खाद्य आवश्यक वस्तु निगम (एसएफसी) के 200, उप्र सहकारी संघ (पीसीएफ), के 3500, उप्र को-आपरेटिव यूनियन (यूपीपीसीयू) के 500, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ (यूपीएसएस) के 250 और भारतीय खाद्य निगम के 150 क्रय केंद्र स्थापित होंगे।

एक लाख से ज्यादा पंजीकरण

खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट पर अब तक एक लाख से ज्यादा पंजीकरण आ चुके हैं। अब तक 1,33,394 किसान पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें कागजात के मिलान के बाद 26,390 किसानों को गेहूं बेचने की हरी झंडी मिल चुकी है। खाद्य आयुक्त मनीष चौहान ने कहा कि जिन किसानों द्वारा धान खरीद के लिए पंजीकरण कराया गया था, उनको केवल जरूरी संशोधन कर दोबारा लॉक कराना होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को आसानी होगी। सुविधा के अनुसार किसान गेहूं क्रय केंद्र का टोकन स्वयं प्राप्त कर सकेंगे।

प्रदेश में अनाज, आलू, चुकंदर से बनेगा एथेनॉल

प्रदेश में किसानों के हित में अहम फैसला किया गया है। प्रदेश में अब एथेनॉल से अनाज, आलू, चुकंदर बनेगा। अभी तक सिर्फ शीरे से ही एथनाल बनाया जाता था लेकिन अब खराब अनाज, आलू, चुकंदर, स्वीट सोरगम आदि से बनाया जाएगा। आबकारी विभाग की एथेनॉल बनाने की नई नीति को मंजूरी मिल गई है। नई नीति को मंजूरी मिलने से किसानों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। इससे किसान अपनी खराब सब्जी और अनाज को भी बेच सकेंगे। आबकारी आयुक्त पी.गुरुप्रसाद ने कहा कि शराब की फैक्ट्रियों की संख्या में पहले की अपेक्षा काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में सिर्फ शीरा से एथेनॉल की आपूर्ति संभव नहीं है। इसके मद्देनजर अनाज से उसे बनाने की नीति बनाई गई है।

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