शिवसेना की होली के रंग में पड़ेगा भंग? अमित शाह से गुपचुप मीटिंग करने शरद पवार पहुंचे अहमदाबाद, शाह ने कहा…

साल 2020, मार्च का महीना, पूरा देश होली के उल्लास में डूबा था, लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस के होली के रंग में भंग पड़ गया. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा और कांग्रेस के चेहरे का रंग उड़ा दिया. 15 सालों के इंतज़ार के बाद मिली सत्ता कांग्रेस के हाथों से महज 15 महीनों में छिटक गई. अब साल 2021, मार्च का ही महीना है, पूरा देश एक बार फिर होली के उल्लास में डूबा है लेकिन ऐसा लगता है इस बार रंग में भंग पड़ने की बारी शिवसेना की है. एंटीलिया केस ने महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा कोहराम मचाया है कि महाविकास अघाड़ी सरकार की नींव हिल गई है. उद्धव अपनी कुर्सी को बचाने की जद्दोजहद में फंसे हैं उधर सरकार में शिवसेना के सहयोगी एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य अमित शाह से गुपचुप मीटिंग कर शिवसेना की नींदे उड़ा दी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शरद पवार और अमित शाह के बीच ये मीटिंग अहदाबाद मे बीजेपी के करीबी कारोबारी के कॉरपोरेट हाउस में हुई. इस मीटिंग में शरद पवार के साथ प्रफुल्ल पटेल भी पहुंचे. अहमदाबाद जाने के लिए पवार ने प्राइवेट जेट इस्तेमाल किया था. इस मुलाकात से पहले यह कारोबारी बारामती में शरद पवार से मिले थे. इस मुलाकात के बारे में जब अमित शाह से पूछा गया तो उन्होंने ये कह कर अटकलों को हवा दे दी कि हर बात सार्वजनिक नहीं की जाती.

सामना में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ एक लेख के बाद शिवसेना और एनसीपी के बीच तनातनी बढ़ गई. शिवसेना नेता संजय राउत ने ‘सामना’ में लिखा कि NCP के सीनियर नेताओं जयंत पाटिल और दिलीप वलसे पाटिल ने यह पद लेने से इनकार किया था, इसलिए शरद पवार ने देशमुख को गृह मंत्री बना दिया. राउत के लेख पर एनसीपी नेता और डेप्युटी सीएम अजित पवार ने कहा कि एनसीपी कोटे में किसे कौन पद मिलेगा, यह (एनसीपी सुप्रीमो) शरद पवार तय करते हैं. किसी और को इस पर सवाल उठाने का हक नहीं है. कांग्रेस ने भी शिवसेना पर लगातार तंज कस रही है. ऐसे में हिली के माहौल में शिवसेना के साथ खेल हो जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं. वैसे भी अमित शाह सत्ता परिवर्तन के उस्ताद माने जाते हैं . जिस तरह से भाजपा के साथ मिलकर चुनाव जीतने के बाद शिवसेना ने भाजपा को धोखा दिया और कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली, अमित शाह उस अपमान को अब तक भूले नहीं होंगे.