International Womens Day Special: यू ट्यूब से 17000 छात्रों को पढ़ाने वाली अलका की कहानी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

भदोही. ऊंची उड़ान का सपना कौन नहीं देखता। पर उसे साकार कोई-कोई ही कर पाता है। और अगर ये सपना कोई महिला देखे तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सपने के अस्तित्व को बचाए रखने की होती है। जिंदगी की जद्दोजेहद और दौड़भाग में अपने सपनों को बचाए रख पाना ही उनके सामने एक बड़ा चैलेंज होता है। पर जो महिलाएं इस चैलेंज को कबूल कर डटकर उसका मुकाबला करती हैं और दुनिया के सामने खुद को साबित करती हैं वो समाज में अपनी तरह की महिलाओं को सपने देखने और उसे साकार करने की हिम्मत भी देती हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Womens Day) पर हम भी एक ऐसी ही महिला की बात करेंगे जिन्होंने अपने सपने के लिये नौकरी कुर्बान कर दी और आज अपने काम की बदौलत एक बड़ा नाम बन चुकी हैं।


हम बात कर रहे हैं भदोही की अलका मैम (Alka Mam) की जो अब किसी पहचान की मोहताज नहीं। मैनपुरी की अलका पढ़ने में शुरू से ही होनहार थीं। एक पढ़ी-लिखी लड़की की तरह उनका भी सपना था कि वो खूब पढ़े और न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हों बल्कि अपनी अलग पहचान भी बनाएं। इसके लिये उन्होंने बीएससी, इतिहास से एमए, पब्लिक एड्मिनिस्ट्रेशन में एमए, बीएड, एमएड और लाॅ की डिग्री बटोरी और अब वो पीएचडी कर रही हैं। शादी हो जाने के बाद थोड़ी जिम्मेदारियां बढ़ीं। पति पीसीएस अधिकारी हैं इसलिये ट्रांसफर होने पर जगह बदलती रहती है। पर उन्होंने बड़े ही सलीके से सपनों और जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बनाए रखा।


अलका बताती हैं कि उन्हें सरकारी नौकरी में भी सफलता मिली लेकिन फिर लगा कि वो कुछ और भी अच्छा कर सकती हैं जिससे अधिक से अधिक लोगों की मदद हो सके। पहले तो उन्होंने कई प्रतिष्ठित वर्चुअल कोचिंग के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों को क्लास देना शुरू किया। फिर खुद का एक यूट्यूब चैनल बनाकर उसपर लगातार नेट, जेआरएफ, टीजीटी-पीजीटी के साथ अन्य प्रतियोगी परिक्षाओं से सम्बंधित कोचिंग क्लास चलाने लगीं। देखते ही देखते यूट्यूब पर उनसे 17 हजार छात्र जुड़कर निशुल्क क्लास लेने लगे।


छात्रों के लाइव क्लासेस (Live Classes) की डिमांड पर अलका ने खुद का कोचिंग एप बनवाकर उसके जरिये पढ़ना शुरू किया और आज उनके साथ बड़ी संख्या में पेड स्टूडेंट भी जुड़कर तैयारी कर रहे हैं। खुद को आत्मनिर्भर (Aatmnirbhar) बनाने के लिए उनकी यह पूरी कोचिंग एक छोटे से कमरे से चलती है, जहां डिजिटल स्क्रीन और कम्प्यूटर के जरिये से वो पूरे दिन अलग-अलग क्लास लेती रहती हैं। बड़ी बात यह कि उन्होंने अपने इस काम से 25 लोगों को रोजगार (Employement) भी दे रखा है जो उनके साथ क्लास लेते हैं, कई टेक्निकल कामों से जुड़े हैं।


अलका बताती हैं कि इससे उनकी अच्छी-खासी अर्निंग भी हो जाती है और उन छात्रों की बेहद कम फीस में घर बैठे तैयारी हो जाती है जो महानगरों में जाकर महंगे कोचिंग संस्थान का खर्च नही उठा सकते। अलका अब समाजहित के कार्य करने के साथ ही एक इंटरप्रेन्योर भी बन चुकी हैं। अलका की अगली योजना है कि वो भदोही जिले के अधिक से अधिक छात्रों को शिक्षा के प्रति मोटिवेट करें और उन्हें गाइड करें कि छात्र इंटरमीडिएट-ग्रेजुएशन के बाद क्या करें।

By Mahesh Jaiswal