रोहित सरदाना को श्रद्धांजलि देने के लिए रवीश कुमार ने लिखा दो किलीमीटर लंबा पोस्ट और फिर उसे किया 11 बार एडिट, आखिर ऐसा क्या लिख दिया?

कहते हैं आपने अपने जीवन में क्या कमाया ये मरने के बाद पता चलता है. न्यूज एंकर और जर्नलिस्ट रोहित सरदाना का असमय जाना सबको रुला गया. सोशल मीडिया पर उनको श्रद्धांजलि देती हुई पोस्ट की बाढ़ आई हुई है. ट्विटर पर वो टॉप पर ट्रेंड कर रहे हैं. उनके साथी पत्रकारों के आंसू नहीं थम रहे लेकिन इस ग़मगीन माहौल में भी एक पत्रकार महोदय ऐसे हैं जो अपना एजेंडा चलाने से बाज नहीं आये. रोहित सरदाना जो श्रद्धांजलि देने के लिए उन्होंने 75 बीघा लम्बा पोस्ट लिखा. लेकिन अपने अन्दर की कुंठा और ज़हर को बाहर निकलने से रोक नहीं पाए. यूँ तो वो रोहित को एक लाइन में भी श्रद्धांजलि दे सकते थे. लेकिन एक लाइन में एजेंडा सेट नहीं होता न, इसलिए अपनी आदत के मुताबिक 75 बीघा में पोस्ट लिखा और उसे 11 बार एडिट किया. पोस्ट की लम्बाई देख कर तो आप अंदाजा लगा ही लिए होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ. फिर भी बता दूँ, मैं ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ, निष्पक्ष मैग्सेसे विजेता पत्रकार रवीश जी की बात कर रहा हूँ.

रोहित सरदाना को श्रद्धांजलि देने वाली इस पोस्ट में रवीश जी उन्हें (रोहित सरदाना) सरकार का पत्रकार बताते हुए कहते हैं कि ‘सरकार को अपने पत्रकारों की मदद करने में पीछे नहीं हटना चाहिए.’ फिर 11 बार में उसे एडिट करते हुए सरकार का पत्रकार हटाकर सिर्फ पत्रकार किया. फिर डॉक्टरों के इलाज, दवा, अस्पताल वगैरह पर सवाल उठाये. डॉक्टर लोग भी निरे बेवक़ूफ़ हैं. उन्हें रवीश जी से पूछ कर दवा वगैरह और इलाज वगैरह करना चाहिए था. आखिर पिछली सरकार भी तो न्यूजरूम में बैठने वालों से पूछ कर मंत्रिमंडल का गठन करती थी न, स्पेक्ट्रम बांटती थी न. तो डॉक्टर ऐसा क्यों नहीं कर सकते.

रायता फैलाना और फिर उस रायते को जीभ से लभेर कर साफ़ करना इस जीरो TRP पत्रकार महोदय की खासियत है. अब आज की ही बात ले लीजिये. बीते दिनों RSS के 85 वर्षीय स्वयंसेवक नारायण दाभादकर की स्टोरी सामने आई, जिसमे उन्होंने अस्पताल का अपना बेड एक युवा को ये कह कर दे दिया कि मैं अपनी ज़िन्दगी जी चुका हूँ. अब रवीश जी ने एक अज्ञात वेबसाइट की स्टोरी को शेयर करते हुए लिखा कि ये फेक कहानी थी. कुछ देर बार उन्होंने वो स्टोरी डिलीट कर दी. शायद उन्हें अहसास हो गया कि उनकी मक्कारी पकड़ी गई है. लेकिन स्टोरी डिलीट करने के बाद कोई सफाई वगैरह नहीं आई.

अभी दो दिन पहले उन्होंने एक और स्टोरी शेयर की थी, मुस्लिम ने किया कोरोना संक्रमित हिन्दू का अंतिम संस्कार क्योंकि उसके परिवार वाले नहीं कर रहे थे. खैर चंद घंटों में ही उस खबर की भी चटनी बन गई. शायद उसे भी श्री श्री रवीश जी ने डिलीट कर दिया है. क्योंकि उनके वाल पर दिखी नहीं. इसलिए कह रहा हूँ, रायता फैलाना और फिर उस रायते को जीभ से लभेर कर साफ़ करना इस जीरो TRP पत्रकार महोदय की खासियत है.