कोरोना से हालात हो रहे खराब, अस्पतालों में कम पड़ रहे बेड, 13 अप्रैल से ओपीडी भी बंद, कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने चेताया लगाना पड़ सकता है लॉकडाउन

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोना (Covid-19) की दूसरी लहर पहली से ज्यादा घातक साबित हो रही है। हर दिन कोरोना के नए मामलों के साथ रिकॉर्ड टूट रहा है। 5 से 11 अप्रैल के बीच के ही आंकड़े को देखें तो पाएंगे कि उत्तर प्रदेश में कोविड के 62 हजार कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। सूबे में कोरोना का सबसे बुरा हाल राजधानी लखनऊ का है। शहर में हर रोज कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं। सोमवार को 3,892 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जो रविवार के मुकाबले 552 कम रही। वहीं, मौतों की संख्या भी घटकर 21 रही। एक ओर अस्पतालों के बाहर जहां मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है, तो वहीं श्मशान घाट पर भी अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इस महासंकट के बीच कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक (Brijesh Pathak) ने एक चिट्टी लिखी है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर खराब व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया, तो लखनऊ में लॉकडाउन लगाना पड़ सकता है।

शहर में खराब हो रहे हालात

सक्रिय मरीजों की संख्या 23,090 हो गई है। कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने चिट्ठी में लिखा है, लखनऊ में स्वास्थ्य सेवा अत्यंत चिंताजनक हालत में है। कोरोना मरीजों की रिपोर्ट मिलने में चार से सात दिन का समय लग रहा है। एंबुलेंस भी मरीजों को समय से नहीं मिल पा रही है और फोन पर बुलाने पर पांच से छह घंटों में एंबुलेंस पहुंच रही है। प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना की जांच बंद हो गई है, जो बेहद गलत है। उन्होंने चिट्ठी में कहा कि शहर में इस वक्त 17 हजार कोविड किटों की जरूरत है, लेकिन 10 हजार ही मिल रही है। बृजेश पाठक ने ये चिट्ठी राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव, अपर मुख्य स्वास्थ्य सचिव को लिखी है।

अस्पतालों में बढ़ाएं बेड्स की संख्या

मंत्री का कहना है कि लोग लगातार मदद के लिए फोन कर रहे हैं, लेकिन सुविधा नहीं हैं इसलिए मदद भी नहीं हो पा रही ह। इतना ही नहीं, मंत्री ने शिकायत की है कि स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में फोन नहीं उठाया जाता है, जिसके कारण दिक्कतें हो रही हैं। मंत्री ने अपनी चिट्ठी में अपील की है कि अस्पतालों में बेड्स की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए, टेस्टिंग पर भी ज़ोर दिया जाए।

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यूपी में कोविड से बुरी स्थिति

पूरे यूपी में कोविड से स्थिति बद से बद्तर होती जा रही है। पिछले दो दिनों में दर्जनभर से अधिक न्यायिक अधिकारी, वकील व कोर्ट के कर्मचारी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। प्रयागराज में पांच वकीलों व एक पेशकार की कोरोना से मौत हो चुकी है। इसे देखते हुए डिस्ट्रिक्ट जज ने कोर्ट को दो दिनों के लिए बंद कर दिया है इस दौरान समूचे परिसर में सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। वहीं, हाईकोर्ट में यूपी सरकार के मुख्य स्थाई अधिवक्ता, विकास चंद्र त्रिपाठी (65) का लखनऊ में निधन हो गया।

18 अप्रैल तक लखनऊ जिला कोर्ट बंद

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण मथुरा जिले के सभी कोर्ट मंगलवार को बंद कर दिए गए हैं। लखनऊ जिला कोर्ट को भी 18 अप्रैल तक के लिए बंद कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने कुछ दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज में कोरोना का टीका लगवाया था, फिर भी वे संक्रमित हो गए। पूर्व सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया रवि भूषण सिंघल, जिला न्यायालय के न्यायाधीश आलोक शुक्ला और लखनऊ जिला कोर्ट के एक एडीजे और तीन न्यायिक कर्मचारियों भी कोरोना पॉजिटिव हैं। इस वजह से जिला कोर्ट को मंगलवार से 18 अप्रेल तक के लिए बंद कर दिया गया है। कोर्ट को सैनिटाइज किया जा रहा है। अब तक दो दर्जन वकील भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। उधर, मथुरा जनपद में तकरीबन आधा दर्जन न्यायिक अधिकारी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. इसके बाद जिला न्यायाधीश ने मंगलवार को जनपद के सभी न्यायालय बंद रखने के आदेश दिए हैं।

शाम चार बजे बंद कर दी जाएंगे घाट

वाराणसी में कोरोना की तेज रफ्तार को देखते हुए हुए जिला प्रशासन ने सभी घाटों, पार्क और स्‍टेडियम में शाम चार बजे के बाद प्रवेश पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध सोमवार से ही लागू हो गया है। डीएम कौशलराज शर्मा ने महामारी अधिनियम के तहत 12 से 30 अप्रैल तक प्रतिबंध लागू किया है। हालांकि घाटों पर आरती के आयोजक, अर्चक, घाट किनारे रहने वाले लोग और नाविकों को इस प्रतिबंध से मुक्‍त रखा गया है। इसके अलावा वाराणसी में लगाए गए नाईट कर्फ्यू का भी पालन किया जाएगा। रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक घर से नहीं निकलने का प्रतिबंध धार्मिक स्‍थलों पर भी लागू होगा। धार्मिक स्‍थलों में एक समय में पांच लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

13 अप्रैल से ओपीडी बंद

बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्‍पताल व ट्रॉमा सेंटर में 13 अप्रैल से ओपीडी और इलेक्टिव ओटी बंद रहेंगे। मरीजों को परामर्श देने के लिए केवल टेली ओपीडी सेवा चालू रहेगी। मरीजों को अपने मोबाइल से बीएचयू की वेबसाइट पर जाकर रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा। पंजीकरण के बाद मरीज का ब्‍यौरा संबंधित विभाग में पहुंचेगा और चिकित्‍सक मरीज द्वारा उपलब्‍ध कराए गए फोन नंबर पर संपर्क कर परामर्श देंगे।

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