मुसलमानों से वोट की अपील कर फंसी ममता, चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस और 48 घंटों में माँगा जवाब

बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी से मिलती तगड़ी चुनौती से निपटने के लिए ममता बनर्जी हर हथकंडे अपना रही है. जिस तरह से भाजपा उनपर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है उससे ममता बनर्जी को हिन्दू वोटों के अपने से छिटकने का डर है. साथ ही पीरजादा अब्बास सिद्धीकी और ओवैसी के भी चुनाव मैदान में आ जाने से मुस्लिम वोटों में बंटवारा भी तय है. अगर ऐसा होता है तो ममता बनर्जी के लिए लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का सपना अधुरा रह सकता है. इसलिए ममता ने मुसलमानों से एकजुट हो कर वोट देने की अपील की थी. लेकिन अब ममता को अपनी ये अपील भारी पड़ गई है. चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजते हुए 48 घंटों में जवाब माँगा है.

ममता ने रायदिघी की एक चुनावी जनसभा में मुस्लिम समाज से वोट न बांटने की बात कहते हुए टीएमसी के पक्ष में एकजुट होकर मतदान की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि पीरजादा अब्बास सिद्धीकी और ओवैसी को भाजपा से पैसे मिले हैं ताकि मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सके. पीएम मोदी ने अपनी एक रैली में ममता को उनके इस बयान के लिए घेरते हुए कहा था कि ‘अगर हमने कहा होता सारे हिन्दू एक हो जाओ तो अब तक हमें चुनाव आयोग का नोटिस आ गया होता. कुछ घंटों के लिए हमें चुनाव प्रचार से रोक दिया जाता और हमारे बाल नोच लिए जाते.’ पीएम मोदी की इस टिप्पणी के बाद भाजपा सक्रिय हुई और चुनाव आयोग से ममता बनर्जी की शिकायत कर दी जिसके बाद चुनाव आयोग ने ममता को नोटिस भेजते हुए जवाब माँगा है.

पश्चिम बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. 2011 से ही इनका वोट TMC को जाता रहा है और TMC ने भी उन्हें लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन इस बार फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्धीकी अपनी अलग पार्टी बना कर कांग्रेस के साथ गठबंधन कर मैदान में हैं जबकि बिहार में शानदार सफलता हासिल करने के बाद ओवैसी ने भी बंगाल में कदम रखा है जिससे ममता बनर्जी के होश उड़े हुए हैं.