भारत ने वैक्सीन मैत्री से की पूरी दुनिया की मदद, लेकिन जब भारत का आया मुश्किल वक़्त तो अमेरिका ने मदद से किया इनकार

ज्यादा दिन नहीं हुआ जब भारत सरकार ने दो स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी दी. उस वक़्त पूरी दुनिया वैक्सीन बनाने की कोशिशों में जुटी थी. मिशन वैक्सीन मैत्री के तहत भारत ने दुनिया भर के देशों को कोरोना वैक्सीन भेजी. क्योंकि सदियों से भारत का मूल मंत्र है वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः. भारत कभी भी मदद करने से पीछे नहीं हटता. लेकिन जब भारत पर मुश्किल घड़ी आई तो खुद को भारत का करीबी दोस्त बताने वाले अमेरिका ने हाथ पीछे खिंच लिए और मदद करने से साफ़ इनकार कर दिया.

बीते कुछ दिनों से भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है. बीते 24 घंटों में देश में कोरोना के साढ़े तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आये. ऐसे में सरकार की सारी उम्मीदें अब वैक्सीन पर टिकी है लेकिन कच्चे माल की कमी की वजह से वैक्सीन के प्रोडक्शन में दिक्कतें आ रही है. भारत में वैक्सीन बनाने के लिए ज्यादातर कच्चा माल अमेरिका से आता है. लेकिन अमेरिका ने मुश्किल वक़्त में कच्चे माल के निर्यात पर लगी पाबंदी हटाने से साफ़ इनकार कर दिया है.

 बाइडन प्रशासन की ओर से साफ कर दिया गया कि उसका पहला दायित्व अमेरिकी लोगों की आवश्यकताओं पर ध्यान देना है. इसलिए भारत की वो कोई मदद नहीं कर सकता. लेकिन अमेरिका का ये तर्क इसलिए बेमानी है क्योंकि खुद अमेरिका के कई सीनेटर ही बाइडन प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं. भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना ने कहा ‘भारत में कोविड-19 से भयावह स्थिति है. लोगों को टीके देने में भी मुश्किलें हो रही है. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के CEO आदार पूनावाला खुद अमेरिकी राष्ट्रपति से गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.