कोर्ट की फटकार और फजीहत के बाद दिल्ली सरकार ने जजों और उनके परिजनों के लिए फाइव स्टार होटल में कोविड केयर सेंटर बनाने का आदेश वापस लिया

अस्पतालों में बेड न मिलने से परेशान लोग, ऑक्सीजन के लिए गलियों की ख़ाक छानते लोगों के बीच दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के जजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों के लिए वीआईपी ट्रीटमेंट का ऐलान करना भारी पड़ गई. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए सवाल किया था कि क्या हमने आपसे वीआईपी ट्रीटमेंट माँगा था जो आप हमें दे रहे, वो भी ऐसे वक़्त में जब लोग सड़कों पर अस्पताल और ऑक्सीजन के इंतज़ार में मर रहे हैं. अपने इस आदेश के बाद दिल्ली सरकार की इतनी फजीहत हुई कि उसने अपना आदेश वापस ले लिया है.

दिल्ली के डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया ने मंगलवार देर रात एक ट्वीट किया कि अशोका होटल में जजों के लिए एक कोविड केयर सेंटर बनाने संबंधी आदेश वापस लेने के निर्देश जारी किए गए हैं. सबसे दिलचस्प बात तो ये थी कि दिल्ली सरकार ने इस बात से इनकार किया कि उसने ऐसा कोई आदेश जारी किया था. दिल्ली सरकार का ये कहना था कि उसे कोई जानकारी ही नहीं है कि ये आदेश किसने जारी किया.

हाई कोर्ट के जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली बेंच ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था, ‘हमने किसी पांच सितारा होटल को कोविड-19 केंद्र में बदलने जैसा कोई आग्रह नहीं किया है. इस आदेश के कारण यह छवि पेश हुई है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने यह आदेश अपने लाभ के लिए जारी किया है या दिल्ली सरकार ने अदालत को खुश करने के लिए ऐसा किया है. ये आदेश गलत था. हाई कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आग्रह नहीं किया गया था, फिर ये आदेश क्यों पारित हुआ.