अयोध्या के मंदिरों सनातन परंपरा से हिंदी नव वर्ष का हुआ स्वागत

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
अयोध्या. राम नगरी अयोध्या में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ पर संतों परंपरागत से बड़े धूमधाम से मनाया गया। और संतो ने कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए अपने मठ मंदिरों में भगवान की भव्य आरती पूजा किया। दुबई श्रद्धालुओं से भी अपने घरों पर पूजन अर्चन करने की अपील की है।

हिंदी नववर्ष संवत्सर का आज प्रारंभ पर रामजन्मभूमि के अस्थाई मंदिर में विराजमान भगवान श्री रामलला अन्य मंदिरों में विशेष आरती पूजन किया गया वहीं तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने संतों के साथ सनातनी परंपरा से स्वागत किया इस दौरान बिगुल , शंखनाद कर घंटा घरियाल के साथ भव्य महाआरती का आयोजन किया। यही नहीं अयोध्या के प्रमुख मंदिर कनक भवन, हनुमानगढ़ी, मणिराम दास छावनी, जानकी महल, राम वल्लभा कुंज, दशरथ महल के साथ अन्य मंदिरों में भी संतो ने इस नववर्ष को लेकर आयोजन किया।

मणीराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने बताया कि हिंदू नव वर्ष उत्सव को सभी लोग बनाना चाहते हैं। लेकिन महामारी के कारण विषम परिस्थिति को देखते हुए हम लोग भी अपने-अपने स्थानों पर ही इस उत्सव को मना रहे हैं और भगवान से कामना किया गया कि कोरोना महामारी दूर हो। और लोग अपने अपने घरों में ही पूजन अर्चन कर भगवान से प्रार्थना करे।

तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने बताया कि आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू नव वर्ष है आज के दिन से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था लेकिन जब बीच में मुगल काल और ब्रिटिश शासन आई तो लोग अपना ही हिंदी नव वर्ष भूल गए। भारतीय संस्कृति को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए और स्वच्छ भारत व समृद्धि भारत बने इसके लिए आज संतो के साथ बड़े ही नव वर्ष का धूमधाम से स्वागत किया गया इस दौरान वैदिक रीति से पूजन अर्चन और मंत्रोउच्चारण किया गया।