कद्दावर नेता मदन भैया और राकेश टिकैत के बीच हुई खास मुलाकात के बाद गर्मायी सियासत

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजियाबाद. गाजीपुर बॉर्डर पर 4 महीने से भी ज्यादा समय से बड़ी संख्या में किसान कृषि कानून की वापसी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। जिसकी अगुवाई भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत कर रहे हैं। इतना लम्बा समय बीत जाने के बाद भी सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है तो अब राकेश टिकैत ने सरकार का राजनीतिक तौर भी विरोध शुरू कर दिया है। टिकैत लगातार किसान आंदोलन को मजबूत करने में लगे हुए हैं। हाल में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले चरण में जिला पंचायत के चुनाव होने हैं। जिसमें सभी पार्टियों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, लेकिन राकेश टिकैत भाजपा के उम्मीदवार को इस चुनाव में शिकस्त देने की तैयारी में लग गए हैं।

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बता दें कि राकेश टिकैत ने गुरुवार को लोनी के पूर्व विधायक मदन भैया से एक खास मुलाकात की। राकेश टिकैत और लोनी के पूर्व विधायक मदन भैया की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाले जिला पंचायत के चुनाव के मामले को लेकर जोड़ा जा रहा है। हालांकि अभी तक राकेश टिकैत ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उधर, पूर्व विधायक का भी कहना है कि उन्होंने शुरू से ही किसानों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है और बिना शर्त के यह समर्थन उन्हें दिया गया है। वहीं, जिस तरह से जहां एक तरफ किसान अपनी मांग पर अडिग हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकार भी कड़ा रुख अख्तियार किए हुए हैं। यानी सरकार भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब राकेश टिकैत का साफ तौर पर कहना है कि जिस तरह से सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। अब सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसके लिए राकेश टिकैत ने एड़ी चोटी तक के जोर लगाए हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि राकेश टिकैत बंगाल चुनाव में भी पहुंचे और बीजेपी के खिलाफ प्रचार किया। वहीं अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाले जिला पंचायत के चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त देने की तैयारी में जुटे हुए दिखाई दे रहे हैं। जिस तरह से एकाएक लोनी के पूर्व विधायक यानी कद्दावर नेता से चुनाव से पहले यह मुलाकात की गई। उससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि कहीं ना कहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रहे चुनाव को लेकर गहन मंथन किया जा रहा है। राकेश टिकैत और पूर्व विधायक मदन भैया की इस मुलाकात के बाद से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग चर्चाएं होने लगी हैं। यह भी माना जा रहा है कि कहीं ना कहीं राकेश टिकैत अब किसान आंदोलन को भूलकर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में लगे हुए हैं।

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