तो इस वजह से इस बार पीएम मोदी नहीं लगाना चाहते लॉकडाउन

जैसे जैसे देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर बढ़ता जा रहा है, उती ही तेजी से इस मसले पर देश में राजनीति भी बढती जा रही है. पहले तो वैक्सीन को लेकर जमकर राजनीति हुई, फिर ऑक्सीजन को लेकर और अब लॉकडाउन को लेकर देश में राजनीति तेज है. देश के नाम अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन लगाना सबसे आखिरी विकल्प होना चाहिए. उन्होंने साफ़ तौर पर लॉकडाउन से बचने की सलाह दी. भाजपा शासित राज्य तो लॉकडाउन लगाने से साफ़ इंकार कर रहे हैं. जिन राज्यों में भाजपा की सरकारे वहां पाबंदी सख्त लगाई भी गई है तो वो इसे कर्फ्यू का नाम देते हैं. यूपी सरकार तो लॉकडाउन लगाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई. वहीँ दूसरी तरफ जिन राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं वो लॉकडाउन लगा रही हैं.

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 7 दिनों का लॉकडाउन लगाया है तो झारखण्ड में भी कांग्रेस समर्थित हेमंत सोरेन की सरकार ने भी 22 से 29 अप्रैल तक के लिए संपूर्ण लॉकडाउन लगाया है. राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने भी 19 अप्रैल से 3 मई तक के लिए संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया है. महाराष्ट्र सरकार भी लॉकडाउन लगाने की तैयारी कर रही है. उद्धव सरकार में शामिल सभी मंत्रियो ने लॉकडाउन की सिफारिश की है.

अब सवाल ये है कि भाजपा शासित राज्य लॉकडाउन लगाने से क्यों बच रहे हैं? तो इसका कारण है पिछली बार लॉकडाउन लगाने से बिगड़े हालात. 2020 में जब पीएम मोदी ने लॉकडाउन लगाने का ऐलान किया था तो अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई थी. लाखों लोगों की नौकरियां चली गई और प्रवासी मजदूरों का पलायन हो गया था. अर्थव्यवस्था की ऐसी बुरी हालत हुई थी जिससे देश अब तक नहीं उबर पाया है. लॉकडाउन लगाने क फैसले का सबसे ज्यादा विरोध कांग्रेस ने ही किया था लेकिन इस बार लॉकडाउन लगाने के पक्ष में कांग्रेस की सरकारें ही हैं.