महोबा के विंध्यवासिनी मंदिर की पुजारीं हैं एक दलित महिला, चौंकने की बात नहीं है

महोबा. समाज में बदलाव की बयार चल रही है। आस्था के लिए भेदभाव और वर्चस्व जैसे शब्द बेमानी होते जा रहे हैं। मंदिरों में अभी तक पुरुष ही वह भी ऊंची जाति जाति से सम्बंध रखने वाले पुजारी होते रहे हैं। पर महोबा में करीब डेढ़ सौ साल पुराने चरखारी स्थित विंध्यवासिनी देवी मंदिर (Vindhyavasini Temple) में पूजन का काम एक महिला पार्वती करती हैं। वह अनुसूचित जाति (Priest Dalit Women) की है। पर इस बात का पूरे इलाके में कही विरोध नहीं है। इस काम को वह पिछले 30 साल से कर रहीं हैं।

रेमडेसिविर इंजेक्शन पर मुख्यमंत्री योगी नाराज कहा, कालाबाजारी और जमाखोरी बर्दाश्त नहीं

ससुराल वालों ने बनावाया था मंदिर :- बिंदेश्वरी विंध्यवासिनी मंदिर पार्वती के ससुराल वालों के पूर्वजों ने बनावाया था। और पार्वती के ससुर मंदिर की देखभाल और पूजापाठ करते रहे है। पर उनके आकस्मिक निधन की वजह से पार्वती ने यह जिम्मेदारी उठा ली। बड़ी संख्या में सर्व समाज के लोग मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं।

मकसद था कि सर्व समाज को जोड़ना :- पार्वती बताती हैं कि, मंदिर स्थापना के पीछे मकसद था कि सर्व समाज को जोड़ा जाए। बांदा में मायका है। करीब 40 साल पहले उनकी शादी चरखारी के सुरेश से हुई। उस समय ससुर सुखलाल मंदिर की पूजा व्यवस्था संभालते थे। उनके निधन होने पर परिवार से बाहर के व्यक्ति को पुजारी बनाया गया।

विरोध का डर मन में था :- पार्वती बताती हैं कि, इस बीच बीमार हो गए। ससुरालवाले मंदिर लाए जहां वहां स्वस्थ हो गईं। उसके बाद मैंने तय किया कि मंदिर में पूजा का काम वह संभालेंगी। विरोध का डर मन में था पर सभी इस फैसले में साथ रहे।

सोमवार को माता का दरबार :- पूरे साल बिंदेश्वरी मंदिर में हर सोमवार को माता का दरबार लगता है। आस-पास के जिले के लोग भी दर्शन को आते हैं। नवरात्रि (Navratri) में भीड़ अधिक रहती है। पर इस बार कोरोना के कारण श्रद्धालुओं की संख्या थोड़ी कम है। मंदिर में शादी, विवाह, मुंडन आदि कार्यक्रम होते हैं। क्षेत्र के लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी है।

पति का भरपूर सहयोग मिलता है :- पार्वती ने बताया कि, उनके पति दुकान चलाते हैं। उनका उन्हें भरपूर सहयोग मिलता है। बड़ा बेटा पुलिस में भर्ती हो गया। दूसरा बेटा पढ़ाई कर रहा है।