वाराणसी में कोरोना संक्रमण : भोले की नगरी में ई-रिक्शा पर ढो रहे शव, ठेके पर अंतिम संस्कार

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. Varanasi Corona infection update : बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी। मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर रात-दिन शव जलते रहते हैं। यह कोई नयी बात नहीं है। नया है तो सिर्फ यह कि यहां रात-दिन जलती चिताओं में से आधे से अधिक शवों की अंतिम क्रिया करने के लिए उनके परिजन मौजूद नहीं हैं। अपने प्रिय को खोने का गम उस पर अंतिम विदाई के लिए आठ-आठ घंटे की लंबी वेटिंग। डरावनी जंग को हार चुके हताश और निराश परिजनों के शव को जलाने के लिए छोड़ जा रहे हैं। 10 हजार से लेकर 20 हजार जिससे जो बन पड़ा उससे अंतिम संस्कार का ठेका ले लिया जा रहा है। मानवता को शर्मशार कर देनी वाली यह हालत पैदा हुई है कोरोना संक्रमण की वजह से बेतहाशा होती मौतों ने।

लखनऊ में कोरोना संक्रमण : पैसा, पॉवर कुछ नहीं आ रहा काम, चिताओं की लपटें चकाचौंध पर पड़ रहीं हैं भारी

मंगलवार को वाराणसी में एक फोटो वायरल हुई। ई-रिक्शा में बदहवास महिला बैठी थी। उसके कदमों में पड़ी थी, उसके जवान बेटे की लाश। वह अपने बेटे के किडनी के इलाज के लिए आई थी। इलाज नहीं मिला। किसे दिखाती। कोई चिकित्सक देखे तब ना। अंतत: बेटा चल बसा। मौत कहीं कोरोना से नहीं? इस आशंका में एंबुलेंस नहीं मिली। फिर वह दुखियारी ई-रिक्शा में बेटे का शव लाद घर चल पड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोरोना संक्रमण के कहर और खौफ को इससे समझा जा सकता है।

...लगता है आंकड़े छुपाने में जुटी सरकार

संक्रमण की दूसरी लहर में प्रदेश के अन्य शहरों की तरह वाराणसी का भी बुरा हाल है। सरकारी अस्पतालों में कोरोना की जांच कम हो रही है। निजी पैथालॉजी और अस्पतालों में कोविड-19 की जांच पर अघोषित बंदी है। लंका क्षेत्र के एक अस्पताल में सुबह से लाइन में लगने के बाद बिना जांच कराए घर लौट रही सुषमा पांडे बताती हैं सरकार का पूरा जोर टीकाकरण पर है। जांच तो हो ही नहीं रही। लगता है सरकार अब आंकड़े छुपाने में लगी है। वाराणसी में रविवार को 2500 से अधिक केस कोरोना संक्रमित केस सामने आए। 16,152 कोरोना एक्टिव मरीज हैं। अब तक 525 की मौत हो चुकी है। लखनऊ के बाद सबसे अधिक एक्टिव केस के मामले में वाराणसी दूसरे नंबर पर है।

धरती के भगवान लापता, ऊपर वाले की आस

पूर्वांचल के एम्स की ख्याति रखने वाले वाराणसी के कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में चार-चार दिनों से भर्ती मरीजों की कुशलक्षेम लेने वाले कोई नहीं हैं। धरती के भगवान का दर्जा रखने वाले चिकित्सक खुद अपनी जान बचाने में लगे हुए हैं। वार्ड नम्बर चार में भर्ती शाहीन बेगम, धिराजी देवी, सावित्री तीन दिनों से भर्ती हैं। वह कहती हैं अभी तक कोई उन्हें देखेने नहीं आया। मंडलीय अस्पताल के अधिकांश चिकित्सक और उनका परिवार संक्रमित हो चुके हैं। बचे हुए चिकित्सक और स्टाफ वार्ड में नहीं जा रहे। यहां के कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ ओपी तिवारी कहते हैं अब तक 17 चिकित्सक संक्रमित हो चुके हैं। मैं और मेरा परिवार भी होम क्वारन्टीन में है। आखिर मरीजों को कौन देखे।

बेड मिली तो ऑक्सीजन ही खत्म

यहां के लक्सा स्थित कोविड हास्पिटल राम कृष्ण मिशन अस्पताल में ऑक्सीजन ही नहीं है। मरीजों के परिवारीजनों को मरीज वापस ले जाने के लिए बोला जा रहा है। कमोबेश, सभी अस्पतालों के आइसीयू व ऑक्सीजन बेड फुल हैं। छह सरकारी अस्पतालों सहित 20 से अधिक निजी हास्पिटल कोविड अस्पताल में तब्दील हैं लेकिन मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा। परेशान हाल बनारसियों का पीएम मोदी ने हालचाल जरूर लिया है। लेकिन उन्होंने भी दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी का ही का ही मंत्र दिया। लेकिन, हर मिनट एक कोरोना पॉजिटिव की पहचान और हर दो घंटे में एक कोरोना पॉजिटिव मौत के बाद अब जनता को सिर्फ भगवान का ही सहारा है।