मंत्री भूले विकास का वादा, आस्था के दर का है यहां जोखिम भरा रास्ता

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
मथुरा। होली से एक सप्ताह बाद सोमवार को शीतला माता के दर पर हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेक कर अपनी हाजिरी लगाई। वहीं श्रद्धालु हर वर्ष इस मुश्किल भरे रास्ते से जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हुए। जिले में दो मंत्री होने के बावजूद भी इस रास्ते का उद्धार आज तक नहीं हो पाया है। पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालु कहते नजर आए कि 'मंत्री भूले विकास का वास्ता, आस्था के दर का है यहां जोखिम भरा रास्ता'।

पूजा अर्चना करने पहुंचे श्रद्धालु
कृष्ण कालीन समय से चली आ रही परंपरा का निर्वाहन आज ही लोग करते चले आ रहे हैं। एक नहीं दो नहीं बल्कि पूरे 12 गांव के लोग इस परंपरा को बखूबी निभाते हैं। सर्दी हो गर्मी हो या बरसात लोग बासौडा पूजते है। थाना हाईवे क्षेत्र के अंतर्गत आने बाले शीतला माता मंदिर ( शेड बाली माता ) के नाम से जाना जाने बाले मंदिर पर बसौड़ा के दिन श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। आज के दिन हजारों लोग बिना स्नान किये और कुछ भी खाये पीये माता के दर्शन के लिए जाते है। शीतला माता मंदिर के पुजारी बाबा निर्भय नाथ ( योगी राज ) ने बताया कि माता के मंदिर का इतिहास पदम पुराण में मिलता है। कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने जब धेनुकासुर का वध किया था तब माता यशोदा ने उनके लिए भोजन भेजा। उन्होंने यह भी बताया कि जब तक भगवान कृष्ण ने उस भोजन को ग्रहण नहीं किया तब तक धेनुकासुर नही मरा था। भगवान कृष्ण ने शीतला माता को भोग लगाया तब से लेकर आज तक यहां 12 गांव के लोग बासौड़ा पूजने आते है। उन्होंने यह भी बताया कि 12 गांव के जो लोग हैं आज के दिन बासी भोजन करते हैं और किसी के भी घर में चूल्हा नहीं जलता। नरहोली, महोली, मासूम नगर, सलेमपुर,मुकुंदपुर, पालीखेड़ा, मथुरा, ऊँचा गाँव के आलावा अन्य गाँव भी शीतला माता मंदिर पर पूजन करने आते है। बारिश के समय इस रास्ते से वाहन से चलना तो दूर की बात है बल्कि पैदल भी नही निकला जाता। तारसी, तालवन, कुदरवन के लोग इस रास्ते से निकलते है।

मंत्रियों से भी नहीं हुआ सुधार
बाबा निर्भय नाथ कहते है कि 2 मंत्री होने के बावजूद भी 25 साल से इस रास्ते का उद्धार नहीं हो पाया है। ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा का जो पहला पड़ाव है वह गांव महोली से शुरू होता है और मंदिर को आने वाले रास्ता ख़स्ता हालत में है। आज ही के दिन नहीं बल्कि हर दिन कोई ना कोई घटना इस रास्ते पर होती है। कई बार तो मेले में आने वाले लोग अपनी दुकान लेकर आते हैं लेकिन रास्ता खराब होने की वजह से दुकान रास्ते में ही पलट जाती हैं। ठेले वाले सामान लेकर आते हैं और उनका सामान को रास्ते में ही गिर जाता है। कई बार जनप्रतिनिधियों से रास्ता बनवाने के लिए गुहार लगाई लेकिन कोई भी नहीं सुनता। ब्रज के मंदिरों का उद्धार तीर्थ विकास परिषद के द्वारा कराया जा रहा है लेकिन आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी ने शीतला माता मंदिर को आने वाले रास्ते की सुध नहीं ली।


By - निर्मल राजपूत