खिसियानी दीदी आरोप लगाये…

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा का नारा है आशोल पोरिबोरतोन जबकि 10 सालों से सत्ता में विराजमान ममता का कहना है कि ये उनका नारा है और उन्होंने 10 सालों में बंगाल को पोरिबोरतित कर दिया है. ममता के दावे में कितना दम है ये तो 2 मई को ही पता चलेगा लेकिन 2011 से 2021 के बीच बंगाल के लोगों ने तो एक ही पोरिबोरतोन देखा है और वो है दीदी के व्यवहार में परिवर्तन. ममता ने अपने सफ़र की शुरुआत वामपंथियों के खिलाफ लोकतंत्र को बचाने के संघर्ष से की थी और अब उनका सफ़र खुद लोकतंत्र को कुचलने तक आ पहुंचा है. ममता जिस तरह से घबराई हुई हैं, बेचैन हैं, जिस तरह से बौखलाई हुई हैं वो उनकी भाषा से साफ़ जाहिर हो रहा है. जिस तेजी से उनके हाथ से सत्ता फिसल रही है उसी तेजी से उनकी जुबान भी फिसलने लगी है. जिस तेजी से दीदी के पुराने साथी उनका साथ छोड़ने लगे, उसी तेजी से दीदी के सोचने और समझने की शक्ति ने भी उनका साथ छोड़ दिया. अब वो अपनी हर अनैतिक बयानबाजी को जस्टिफाई करने लगी है.

आपने कभी दलदल में फंसे किसी जानवर या इन्सान को देखा है? वो बाहर निकलने के लिए जितना हाथ पाँव मारता है उतना ही और अन्दर धंसते चले जाता है. दीदी में चुनावी दलदल में फंस गई है. उसी दलदल में उन्हें कमल खिलता दिख रहा है, उस कमल को उखाड़ने के लिए दीदी जितना हाथ पाँव मर रही हैं उतने ही और धंसते चली जा रही है. कूचबिहार में हुई हिं’सा के लिए ममता केंद्रीय बलों और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहरा रही है. लेकिन ममता का वो भाषण भी अब तक लोगों को याद है जिसमे वो सुरक्षा बलों को घेरने के लिए उकसा रही है. ममता बनर्जी अमित शाह से इस्तीफ़ा मांग रही हैं जबकि बतौर मुख्यमंत्री इस पूरो घटना की जिम्मेदारी उनकी है, क्योंकि इस तरह से उकसाने वाली बयानबाजी ममता की तरफ से ही आई और जिस इलाके में खड़े हो कर ममता ने ये बयान दिया था उसी इलाके में ये घटना हुई.

इंसान तब बौखलाता है जब उसे समझ नहीं आ रहा हो कि हो क्या रहा है? ममता बनर्जी को समझ नहीं आ रहा कि उनके साथ क्या हो रहा है. उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि वो अपने साथ क्या कर रही हैं? उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि जिस बंगाल में बीजेपी का कोई नामलेवा नहीं था उस बंगाल में अमित शाह के रोड शो में इतनी भीड़ कहाँ से उमड़ के आ रही. जब कुछ समझ नहीं आता तो इंसान बौखला ही जाता है, ममता की समझ से सब चीजें बहार चली गई तो वो भी बौखला गई हैं. और बौखलाहट में वो ऐसी हरकतें कर रही जिसे देख बीजेपी की दिल बाग़ बाग़ हो गया है. जय श्री राम से चिढने वाली ममता कभी चंडीपाठ कर रही और गोत्र बता रही हैं तो कभी नंदीग्राम जीतने के लिए भाजपा कार्यकर्त्ता से ही मदद मांग रही हैं, कभी केंद्रीय बलों को घेरने की बात कर रही तो कभी पीएम के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही. रही सही कसर और फजीहत उनके चाणक्य प्रशांत किशोर के उस लीक क्लब हाउस चैट ने करवा दी. कुल मिला कर इस वक़्त ममता का हाल ‘खिसियानी दीदी आरोप लगाये’ वाला है.