सरकार का बड़ा फैसला, अब यूपी में भी बिना Hallmark के ज्वैलरी नहीं बेच सकेंगे व्यापारी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मेरठ। hallmark gold rate today. एशिया की सबसे बड़ी स्वर्ण आभूषणों (jewellery market) की मंडी मेरठ (meerut) में हर रोज करोड़ों का व्यापार होता है। पिछले कुछ समय से सोने (gold rate today) के दामों में हो रहे बदलाव के चलते मेरठ समेत वेस्ट यूपी के स्वर्ण बाजार में लगातार रेटों (today’s gold rate) में तब्दीली देखने को मिल रही है। इस बीच अब सरकार द्वारा एक जून से हॉलमार्क ज्वैलरी (hallmark jewellery) बेचना अनिवार्य करने के फैसले का असर वेस्ट यूपी के ज्वैलरी व्यापारियों पर भी देखने को मिलेगा। मेरठ ऑल इंडिया ज्वैलरी मैन्यूफैक्चिरिंग एसोसिएशन केप अध्यक्ष डा संजीव अग्रवाल ने बताया कि अगर ज्वैलर्स (jewellers) ने आभूषण में ज्यादा मिश्रित धातु का इस्तेमाल किया है तो उसके आभूषण को बीआईएस 14 कैरेट मानव वाले हॉल मार्किंग करेगा और कम मिश्रित धातु वाले आभूषणों को 22 कैरेट मानक वाले हॉल मार्किंग करेगा। यानी हॉल मार्किंग की अनिवार्यता के बाद कोई भी ज्वेलर्स 14 कैरेट सोने को 22 कैरेट के दाम पर नहीं बेंच सकेगा।

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डा संजीव अग्रवाल ने बताया कि मेरठ में पहले से हॉलमार्क ज्वैलरी बननी शुरू हो चुकी है। पहले इसका विरोध किया गया था। लेकिन सरकार तारीख पर तारीख देती रही। इससे छोटे व्यापारी बेकार हो जाएंगे। मेरठ में 6 हालमार्क सेंटर हैं। जो मेरठ ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के बने स्वर्ण आभूषणों को हॉलमार्क करते हैं। अब सरकार का आदेश आया है कि कोई भी ज्वैलर बिना हॉलमार्क के आभूषण नहीं बेच सकेगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इससे पहले वर्ष 2019 में 15 जनवरी 2000 से पूरे देश भर में गोल्ड हालमार्किग वैधानिक की गई थी। लेकिन भारतीय स्वर्ण एसोसिएशन के पदाधिकारी केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के अधिकारियो से मिले और इसकी समय सीमा बढाकर 1 जून 2021 कर दी गई। अब सरकार किसी भी कीमत पर इसकी समय सीमा बढ़ाने को तैयार नहीं है।

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तीन श्रेणियों में हॉलमार्किंग :—

डॉ अग्रवाल ने बताया कि सोने के ज्वैलरी की हॉलमार्किंग के लिए अधिकृत बीआईएस ने तीन श्रेणियों में क्रमशः 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट के लिए हॉलमार्क के मानक तय किए हैं। चूंकि अभी हॉलमार्क स्वैच्छिक है, इसलिए लोगों को अपने घरों में पड़े गैर हॉल मार्क वाले सोने की हॉल मार्किंग के लिए नजदीकी बीआईएस केंद्र पर जाकर प्रक्रिया पूरी कर लेना चाहिए वरना फिर बाद में पछतावा ही हाथ लगेगा। माना जा रहा है कि हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से सोने की खऱीदारी के समय उसकी शुद्धता पर ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि मौजूदा दौर में ज्वेलर्स ज्यादा कैरेट बताकर कम कैरेट वाला सोना ग्राहकों को बेच रहे हैं, लेकिन हॉलमार्किंग लागू होने के बाद ज्वेवर्स के लिए ऐसा करना पाना संभव नहीं होगा।