Sunday Special : क्या कोरोना की दूसरी लहर के कारण बाजार में आएगी 2020 वाली गिरावट? विश्लेषकों की बढ़ी चिंताएं

शेयर बाजार कोरोना वायरस

शेयर बाजार कोरोना वायरस

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस (Corona Virus in India) के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। हालत तो यह है कि प्रतिदिन तीन लाख से भी अधिक संक्रमित मिल रहे हैं जो हर किसी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं कोराना वायरस के तेजी से विस्‍तार होने से शेयर बाजार (Stock Market) में दबाव जारी है। निवेशक सतर्क होकर कारोबार कर रहे हैं और लगातार मुनाफा वसूली देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बाजार पर मौजूदा दबाव आगे भी जारी रहने वाला है। इस बारे में क्रेडिट सुइस (सीएस) वेल्थ मैनेजमेंट का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के चलते बाजार में जो करेक्‍शन चल रहा है, वह एक्‍सटेंड हो सकता है। इक्विटी मार्केट (Equity Market) आने वाले हफ्तों में कुछ और प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking) देखने को मिल सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है उम्मीद है कि यह करेक्‍शन बहुत तेज और लंबे समय तक नहीं रहेगा। बता दें कि फरवरी में आलटाइम हाई से सेंसेक्‍स में 9 फीसदी गिररावट आ चुकी है। सेंसेक्‍स मंगलवार को 3 महीने के लो पर आ गया था।

क्या मार्किट में पिछले साल वाली आएगी गिरावट

हर दूसरा विश्लेषक जमीनी हकीकत का जायजा लेने में व्यस्त है। उनका मानना ​​है कि खपत बड़े पैमाने पर प्रभावित होगी। विशेष रूप से ऑटो, सीमेंट, स्टील, कपड़ा, बैंकिंग और एनबीएफसी जैसे क्षेत्रों में। बैंक और एनबीएफसी के लिए कर्ज लेने वालों की कमी की बात कही जा रही है। सीमेंट (Cement), स्टील (Steal) और ऑटो सेक्टर (Auto Sector) के बारे में वे सोचते हैं कि डीलर डिलीवरी नहीं उठाएंगे और खुदरा खपत रुक जाएगी। उनका यह भी मानना है कि अगर राष्ट्रीय लॉकडाउन (National Lockdown) लगा, तो परिस्थितियां अत्यधिक खराब हो जाएंगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले साल कोरोना वायरस महामारी की वजह से लगाए गए संपूर्ण लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था का खासा नुकसान पहुंचाया था। पिछले साल कोरोना के मामले अब मुकाबले कम थे लेकिन वैक्सीन मुहैया ना होने की वजह से शेयर बाजार में गिरावट का दौर था। हालांकि अब पूरे देश में कोरेाना वैक्सीन (Corona Vaccine) मुहैया है और इस अभियान के तहत लोग बढ़-चढ़कर टीका लगवा भी रहे हैं। तो ऐसा अनुमान है कि शेयर बाजार में पिछले साल 2020 जैसी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी।

मॉनेटरी पॉलिसी भी बाजार के अनुकूल

रिपोर्ट के अनुसार निवेशकों को अभी 6 से 9 महीने की अवधि को ध्‍यान में रखकर निवेश करने की सलाह है। रिपोर्ट में उन्‍होंने कहा कि जबकि हमारी वैश्विक निवेश समिति (आईसी) यह मानती है कि इक्विटी के लिहाज से निकट अवधि में चुनौतियां रहेंगी, लेकिन मिड टर्म के लिहाज से इक्विटी पर पॉजिटिव आउटलुक है। असल में अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ को लेकर संभावनाएं बेहतर हैं, वहीं मॉनेटरी पॉलिसी भी बाजार के अनुकूल है।

कोरोना के बढ़ते मामले सबसे भारी चुनौती

क्रेडिट सूईस की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में सबसे भारी चुनौती कोरोना वायरस के लगातार बढ रहे मामले हैं। बता दें कि बीते 2 दिन की बात करें तो औसतन प्रतिदिन 3 लाख से ज्‍यादा मामले आए हैं। यह दुनियाभर के किसी भी देश की तुलना में रिकॉर्ड एक दिनी संख्‍या है। इसके अलावा बॉन्‍ड यील्‍ड में तेजी भी एक चुनौती है, जिससे इक्व्टिी से निवेशक दूर हुए हैं। डॉलर का रुपये की तुलना में मजबूत होना भी एक चुनौती है।

मिडकैप और डिफेंसिव शेयरों पर रहे नजर

क्रेडिट सूईस की रिपोर्ट के अनुसार बाजार की गिरावट को एक खरीददारी के मौके के रूप में लेना चाहिए। मौजूदा समय मिडकैप और डिफेंसिव शेयरों पर नजर रखने का है। वित्‍त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही से एक बार फिर ग्रोथ लौटेगी तो इन शेयरों में निवेश का फायदा मिलेगा।