वैक्सीन की बर्बादी में अव्वल रहे कांग्रेस शासित ये राज्य, यहाँ 30 फीसदी से अधिक वैक्सीन हुई बर्बाद

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने जब देश में तांडव मचाना शुरू किया और केंद्र सरकार ने 18 साल से अधिक उम के लोगों के वैक्सीनेशन का ऐलान किया तब वैक्सीन की कमी को लेकर देश में सियासत शुरू हो गई. गैर भाजपा शासित राज्यों ने केंद्र पर आरोप लगाये कि केंद्र ने वैक्सीन दुनिया भर के देशों में भेज दी जिस वजह से देश में वैक्सीन की कमी हो गई. लेकिन ये भी एक तथ्य था कि राज्यों ने वैक्सीन की बहुत बर्बादी की.

केंद्र ने राज्यों के साथ टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा की और इस बैठक की अध्‍यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने की. इस बैठक में वैक्सीन की बर्बादी पर भी चर्चा की गई. समीक्षा में ये सामने आया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राज्यों को टीकों की बर्बादी 1% से कम रखने की सलाह के बावजूद, झारखंड जैसे राज्यों में 37.3 फीसदी की बर्बादी दर्ज की गई है. दूसरे नंबर पर कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ का नंबर है. छत्तीसगढ़ में 30.2 फीसदी वैक्‍सीन की बर्बादी हुई. छतीसगढ़ जहाँ कांग्रेस शासित राज्य है वहीं झारखण्ड में कांग्रेस सत्ता में साझीदार है.

वैक्सीन की बर्बादी में तीसरे नंबर पर तमिलनाडु का नाम है. तमिलनाडु में 15.5 फीसदी वैक्सीन की बर्बादी हुई जबकि जम्मू कश्मीर 10.8 फीसदी के साथ चौथे नंबर पर और भाजपा शासित मध्य प्रदेश 10.7 फीसदी के साथ पांचवे नंबर पर है. वैक्सीन की बर्बादी का राष्ट्रीय औसत 6.3 फीसदी है. वैक्सीन के एक वायल में 10 से 12 डोज होते हैं. वायल खोलने के बाद अगर आधे घंटे के भीतर उसे नहीं लगाया गया तो वह बेकार हो जाता है. शुरुआत में लोगों के मन में वैक्सीन के प्रति तरह तरह की शंकाएं थी. उस पर से ये स्वदेशी वैक्सीन थी. भारत में वैक्सीन को लेकर इतनी राजनीति हुई कि लोगों के मन में शंका उत्पन्न हुई और वो बैक्सीन लेने में हिचकिचाने लगे.