बिहार के सेनारी में हुए 34 लोगों के न’रसंहा’र मामले में पटना हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला, 13 आरोपियों को किया बरी

90 का दशक, बिहार में लालू परिवार का शासन था. राज्य में जातीय हिं’सा अपने चरम पर थी. हर जाति की अपनी एक आर्मी थी. कभी किसी गाँव पर ह’मला कर दलितों की ह’त्या कर दी जाती तो कभी किसी गाँव पर ह’मला कर सवर्णों का खू’न बहाया जाता था. सबकी आँखों में ब’दले की आ’ग दह’कती रहती थी. इसी आ’ग में ज’ल गया था सेनारी गाँव. 18 मार्च 1999 की रात को सेनारी गाँव पर करीब 500 ह’थियारबं’द लोगों ने घेर कर ह’मला कर दिया. घरों से मर्दों को खिंच खिंच कर बाहर निकाला गया. उन्हें गाँव के बाहर खेत में ले जा कर लाइन में लगा कर गला रे’त ह’त्या कर दी गई. गला रे’ते जाने से भी जब संतोष न हुआ तो तड़’पते लोगों का पेट ची’र डाला गया.उस रात सेनारी के कई घर मर्द विहीन हो गए.

सालों चले मुक़दमे के बाद निचली अदालत ने 2016 में 10 दोषियों को फां’सी और 3 को उ’म्रकै’द की सजा सुनाई थी. लेकिन आज पटना हाई कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया. अश्विनी कुमार सिंह और अरविंद श्रीवास्तव की खंडपीठ ने शुक्रवार को दोषियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया. दोषियों की तरफ से निचली अदालत के फैसलों को हाई कोर में चुनौती दी गई थी. जिस पर आज पटना हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया.

जिनकी ह’त्या की गई वो सभी सवर्ण जाति के थे और जिसने इस न’रसंहा’र को अंजाम दिया वो था प्रतिबंधित संगठन MCC. इस पूरे केस में 70 आरोपी थे. 20 आरोपियों को निचली अदालत ने बरी कर दिया था. 4 आरोपियों की मौ’त हो गई थी और 13 को आज हाई कोर्ट ने बरी कर दिया.