बेचारी कांग्रेस : सबकुछ गंवा कर बीजेपी की हार में ही हो रही खुश, पार्टी में फिर तेज होगी बगावत की आंधी

2 मई को आये 5 राज्यों के विधानसभ चुनाव के नतीजे सब के लिए खुशियाँ ले कर आये सिवाए कांग्रेस के. लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ख़ुशी में नाच रही है. क्योंकि बंगाल में बीजेपी सत्ता में नहीं आ सकी. ऐसी बेचारी राजनीतिक पार्टी पूरी दुनिया के इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिली होगी, जो खुद शून्य पर सिमट गई, राज्य में उसका अस्तित्व समाप्त हो गया, लेकिन वो इसलिए खुश है क्योंकि उसकी सक्बसे बड़ी विरोधी सत्ता में नहीं आ सकी.

5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा अगर किसी पार्टी ने पाया है तो वो भाजपा ही है और सबकुछ जिसने गंवाया है वो कांग्रेस ही है. भाजपा ने असम में अपनी सत्ता बचाए रखी. गठबंधन के साथ पुडुचेरी में सत्ता पहली बार हासिल की. पुडुचेरी में भाजपा ने कांग्रेस से ज्यादा सीटें हासिल की. जबकि दक्षिण का ये राज्य भाजपा के लिए सपना ही हुआ करता था. पश्चिम बंगाल में पार्टी ने पूरा जोर लगाया लेकिन सत्ता में नहीं आ सकी. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि बंगाल में भाजपा के हाथ कुछ नहीं आया. बंगाल में पार्टी ने अपना आंकड़ा 3 से बढ़ाकर 77 कर लिया और मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई. बंगाल में भाजपा ने दरअसल कांग्रेस और लेफ्ट का सूपड़ा साफ़ कर के उनकी जगह ले ली. तमिलनाडु में AIADMK के साथ उसे हार का मुंह देखना पड़ा. वहां DMK और कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली. लेकिन इस गठबंधन में कांग्रेस की क्या हैसियत है ये सब जानते हैं.

केरल में कांग्रेस के सत्ता में आने का सपना चूर चूर हो गया. वो भी तब जब केरल के ही वायनाड से बतौर सांसद राहुल गाँधी ने पूरा जोर लगाया. पुडुचेरी में कुछ समय पहले तक सत्ता में रही कांग्रेस के हाथ खाली रहे. असम में राहुल और प्रियंका ने पूरा जोर लगाया. CAA को मुख्य मुद्दा बनाया. 8 पार्टियों के साथ महागठबंधन में उतरी फिर भी भाजपा गठबंधन को हरा नहीं पाई. बंगाल में तो पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल सकी. पिछली बार पार्टी ने 44 सीटें जीती थी और वोट शेयर था 12.25 लेकिन इस बार उसका खाता भिनाही खुला और वोट शेयर सिमट के रह गया 2.94 फीसदी.

लेकिन क्या इससे कांग्रेस पर कोई असर पड़ा? नहीं, पार्टी इतनी बेअसर हो रही है कि उसे अब अपनी हार का भी कोई असर नहीं पड़ता. तभी तो राहुल गांधी ने ममता बनर्जी को जीत की बधाई देते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई. लोगों ने इस बधाई सन्देश के लिए सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी को खूब ट्रोल किया. लोगों ने कहा खुद की पार्टी का खाता नहीं खुला और वो दूसरों की हार में खुश हो रही है.

देश की सबसे पुरानी पार्टी जिसने एक वक़्त में पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक के राज्यों में एकक्षत्र राज किया. आज वो दूसरों की हार में अपनी ख़ुशी ढूँढने की मोहताज हो गई है. इससे बड़ी विडंबना क्या होगी. वैसे इए बेशर्मी भी कह सकते है.