देश में कोरोना को मात देने के लिए सुप्रीमकोर्ट ने लॉकडाउन लगाने की कही बात…

देश में कोरोना संक्रमण की वजह से चारो ओर हाहाकार मचा हुआ है. हर तरफ से हताश और निराशा से भरी हुई खबरें सुनने को मिल रहीं हैं. इस कोरोना नामक खतरनाक बीमारी ने सबकुछ तबाह करके रख दिया है. कोरोना ने सबके मन में अपने प्रति डर बना के रखा है. आज के समय में किसी ऐसे व्यक्ति को खोजना बहुत ही कठिन है कि उसके सगे-संबंधी या फिर कोई मित्र इस कोरोना जैसे घातक बीमारी के चपेट में न आया हो. अब आपको बता दें कि देश में इस बढ़ते हुए कोरोना के आतंक को रोकने के लिए सुप्रीमकोर्ट ने लॉकडाउन लगाने की बात कही है.

सुप्रीमकोर्ट ने अपना विचार रखते हुए कहा है कि बढ़ते हुए कोरोना के कहर को रोकने के लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकार लॉकडाउन लगाने पर विचार कर सकती हैं. जैसा कि हम सभी लोग इस बात से परिचित हैं की कई राज्यों ने कोरोना कर्फ्यू लगाया हुआ है. लेकिन इतना रोकथाम करने के बाद भी कोरोना का संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है. आपको बता दें कि बीते रविवार रात को सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई करते हुए ये भी कहा कि हम केन्द्र सरकार और राज्य सरकार से सामूहिक समारोहों और सुपर स्प्रेडर कार्यक्रमों पर रोक लगाने पर विचार करने का आग्रह करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपनी बात दोहराते हुए केन्द्र सरकार और राज्य सरकार से कहा कि लोक कल्याण के हित में कोरोना के दूसरी लहर को काबू करने के लिए लॉकडाउन पर विचार कर सकतें हैं. साथ ही अदालत ने ये भी कहा कि लॉकडाउन के समय कमजोर वर्गों की देख – रेख के लिए बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए. आगे सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि वह लॉकडाउन से होने वाले सभी प्रभावों से परिचित हैं. कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन का सबसे अधिक प्रभाव गरीबों पर ही पड़ता है. अगर सरकार लॉकडाउन लगाने पर विचार कर रही है तो उन्हें लॉकडाउन के दौरान गरीबों को होने वाले तकलीफों का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा.