पाकिस्तान और रूस के बीच बड़ी डील, भारत के लिए है चिंता की बात

आज़ादी के बाद से ही भारत और रूस के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध रहे हैं. शीत युद्ध के दौर में ये सम्बन्ध और परवान चढ़ा. भारत और सोवियत संघ में मजबूत रणनीतिक, सैनिक, आर्थिक, एवं राजनयिक सम्बन्ध रहे हैं. सोवियत संघ के विघटन के बाद भी दोनों के संबंधों में कोई परिवर्तन नहीं आया. रूस ने भी हमेशा अपने संबंधों को लेकर भारत को पाकिस्तान के ऊपर तरजीह दी. लेकिन बाद के दौर में भारत का झुलाव अमेरिका की तरह हुआ और मौके का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान ने रूस क साथ अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश शुरू की. जिसका परिणाम है रूस और पाकिस्तान के बीच हुई एक बड़ी डील, जिसने भारत के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच दी है.

अप्रैल में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ऊर्जा क्षेत्र में मदद मुहैया कराने के साथ पाकिस्तान को विशेष सैन्य उपकरण मुहैया कराने का आश्वासन दिया था. इसी कड़ी में रूस और पाकिस्तान के बीच एक गैस पाइपलाइन के निर्माण के लिए समझौता हुआ है. पकिस्ता और रूस के बीच ये समझौता ऐसे वक़्त में हुआ है जब अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंधों में दूरी आ गई है. अमेरिका ने पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता बहाल किए जाने से इनकार कर दिया है. 

1,100 किलोमीटर लंबी परियोजना को पहले नॉर्थ-साउथ पाइपलाइन के रूप में जाना जाता था. लेकिन बाद में इसका नाम बदल कर पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन’ कर दिया गया. इस पाइपलाइन के जरिये सालाना 12.4 बिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस ले जाने की योजना है. पाकिस्तान इस परियोजना के जरिये मास्को के साथ एक रणनीतिक साझेदारी चाहता है जो ठीक उसी तरह का हो जो रूस और भारत के बीच है. जिसमे रक्षा सहयोग भी शामिल है. दूसरी तरफ भारत के झुकाव अमेरिका की तरफ हो जाने के बाद रूस भी दक्षिण एशिया में अपने लिए एक नया साझीदार ढूंढ रहा है.