देश में कोरोना काल में अब तक 23 रुपये तक बढ़े पेट्रोल के दाम, जानें तेल भरवाने के लिए अभी और कितनी ढीली हो सकती है आपकी जेब

पेट्रोल डीजल  के दाम

पेट्रोल डीजल  के दाम

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस महामारी (Corona Virus in India) ने खूब तबाही मचाई है। खास कर कोरोना की दूसरी लहर ने तो हर तरफ तबाही का ऐसा मंजर पेश किया है जो एक बुरी और दिल दहला देने वाली यादें बनकर रह गया है। इस घातक बीमारी से लोगों की जानें तो गई ही हैं साथ ही जो इस बीमारी से बच गए हैं उन पर महंगाई का ऐसा पहाड़ टूटा हुआ है जिससे आम लोगों की कमर टूटी हुई है। खासकर पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) की ही बात करें तो तेल के दाम इस समय रिकॉर्ड ऊंचाई पर बने हुए हैं। पिछले साल से लेकर अब तक इस कोरोना काल के बीच पेट्रोल के दाम 23 रुपये तक बढ़ाए जा चुके हैं। तेल कंपनियों द्वारा बढ़ोतरी का सिलसिला अभी भी जारी है। इसी तरह खाने के तेल में भी जमकर इजाफा हुआ है। 02 मार्च 2020 को पेट्रोल के रेट 71.49 रुपये वहीं डीजल का भाव 64.10 रुपये प्रति लीटर था।

क्यों बढ़ रहे पेट्रोल डीजल के दाम

7 साल पहले पेट्रोल की खुदरा कीमतों में करीब दो-तिहाई हिस्सा कच्चे तेल का होता था। आज लगभग इतना ही हिस्सा केंद्र और राज्यों के टैक्सेज का हो गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि पेट्रोल पर केंद्र सरकार (Central Government) राज्यों के मुकाबले ज्यादा टैक्स ले रही है। औसतन देखें तो राज्य सरकारें हर एक लीटर पेट्रोल पर करीब 20 रुपये का टैक्स ले रही हैं, जबकि केंद्र सरकार करीब 33 रुपये प्रति लीटर। राज्य सरकारों द्वारा पेट्रोल-डीजल पर लगाया गया बिक्री कर या वैट हर राज्य में अलग-अलग होता है।

सरकार ने 13 बार बढ़ाई एक्साइज ड्यूटी

बता दें कि वर्तमान में केंद्र सरकार प्रति लीटर पेट्रोल पर बेसिक एक्साइज, सरचार्ज, एग्री-इन्फ्रा सेस और रोड/इन्फ्रा सेस के नाम पर कुल 32.98 रुपये वसूलती है। डीज़ल के लिए यह 31.83 रुपये प्रति लीटर है। अब तक सरकार ने 13 बार एक्साइज ड्यूटी (excise duty) बढ़ाई है। पेट्रोल और डीजल पर आखिरी बार मई 2020 में पेट्रोल पर 13 रुपये और डीज़ल पर 16 रुपये प्रति लीटर सरचार्ज बढ़ाया था।

आधी हो सकती है पेट्रोल डीजल की कीमत

यदि केंद्र सरकार पेट्रोलियम उत्पादों को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के दायरे में ले आए तो आम आदमी को राहत मिल सकती है। अगर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत शामिल किया जाता है, तो देश भर में ईंधन की एक समान कीमत होगी। यही नहीं, यदि जीएसटी परिषद ने कम स्लैब का विकल्प चुना, तो कीमतों में कमी आ सकती है। वर्तमान में, भारत में चार प्राथमिक जीएसटी दर हैं- 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। जबकि अभी केंद्र व राज्य सरकारें उत्पाद शुल्क व वैट के नाम पर 100 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स वसूल रही हैं।