राजस्थान में फिर छाए सियासी संकट के बादल, गहलोत सरकार के मंत्री के साथ पायलट समर्थकों ने जानिए क्या किया

कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं. एक मुसीबत थमती नही है कि दूसरी सामने आ जाती है. कांग्रेस पार्टी की देश के कुछ ही राज्यों में सत्ता बची हुई है वहीं मध्यप्रदेश से सत्ता गंवा दी. वहीं कई राज्यों में आपसी कलह नही ख़त्म हो रही है. पंजाब और राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के नेताओं में आपस में ही कलह थमने का नाम नहीं ले रही है. इसी बीच एक बड़ी खबर राजस्थान से आ रही है.

जानकारी के लिए बता दें राजस्थान में पिछले साल भी पायलट और गहलोत गुट के बीच तनातनी हो गयी थी. जिसके बाद काफी दिन तक राज्य में सियासी ड्रामा चला फिर बाद में सचिन पायलट को आलाकमान ने कैसे भी करके मनाया. तब जाकर राज्य में से सरकार गिरने का संकट टला था लेकिन अब राजस्थान में एक बार फिर पायलट समर्थकों का सब्र जवाब देने लगा है.

दरअसल कांग्रेस में सचिन पायलट का कुछ होते हुए नहीं दिख रहा तो उनके समर्थक भी निराश है. पिछली साल जब पायलट ने बागी तेवर अपनाए थे तो उनसे प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम का पद ले लिया गया था. अब राजस्थान सरकार में मंत्री भजनलाल जाटव को अपने क्षेत्र जसपुरा मोरोली (भरतपुर) में एक कॉलेज का उद्घाटन करने जाना भारी पड़ गया. बीच राह में ही उनका पायलट समर्थकों ने जबरदस्त विरोध शुरू कर दिया. जिसके बाद मंत्री जी किसी तरह से वहां से बचते हुए निकले. बताया जा रहा है कि मंत्री गांव पहुंच गए मगर उनके विरोधी इतने ज्यादा थे कि उनको आनन फानन में कॉलेज से भी भागना पड़ा.

गौरतलब है कि राज्य के मंत्री भजन लाल जाटव की सुरक्षा में काफी फ़ोर्स तैनात था इसके बावजूद भी मुर्दाबाद के नारे सुनने पड़े. सबसे बड़ी बात ये है कि कांग्रेस नेता ही अपनी पार्टी के नेता का विरोध कर रहे थे. इसके पीछे की वजह ये है कि भजन लाल जाटव पायलट गुट के विधायक थे उन्होंने ही इनको टिकट दिलवाया था. इतना ही नहीं पायलट के कहने पर ही उनको मंत्री बनाया गया था लेकिन जब सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच में विवाद हुआ तो भजनलाल जाटव ने पाला बदलते हुए गहलोत का साथ दिया. कहा जा रहा है कि राजस्थान में एक बार फिर से सियासी संकट के बादल छाने लगे हैं. पिछले साल जुलाई जैसे हालात बनते जा रहे हैं. इसके पीछे की वजह ये है कि पायलट गुट के कई विधायक अब बगावत के मूड में नजर आ रहे हैं. आलाकमान के साथ हुए समझौते में सचिन पायलट को अब तक कुछ नहीं मिला. जिसके चलते कई विधायकों में नाराजगी गहलोत के प्रति बढ़ती जा रही है.